Saturday, 29 August 2026

कांग्रेस जयपुर संभागीय सम्मेलन में मंच पर नेताओं की बातें और बयान, क्या कुछ मायने हैं, प्रभारी रंधावा की समझ से है दूर पर दावा कर रहे हैं नहीं है गुटबाजी !


कांग्रेस जयपुर संभागीय सम्मेलन में मंच पर नेताओं की बातें और बयान, क्या कुछ मायने हैं, प्रभारी रंधावा की समझ से है दूर पर दावा कर रहे हैं नहीं है गुटबाजी !

आखिर जयपुर कांग्रेस के संभागीय सम्मेलन में जो कुछ देखने को मिला उससे यह कहा जा सकता है कि प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा पार्टी को एकता के संदेश देने में सफल नहीं हो पाए। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि पार्टी  कार्यकर्ताओं नेता एक हैं और कोई गुटबाजी नहीं है। लेकिन उन्हें कहा जाए कि उनके कहने से पार्टी में एकता आने वाली नहीं है मंच पर ही बगावत करने वाले जलदाय मंत्री डॉ महेश जोशी का ऐलान करना कि सीएम अशोक गहलोत चौथी बार भी बनेंगे मुख्यमंत्री। उन्होंने अपनी बात का समर्थन कराने के लिए खुले तौर पर नारेबाजी भी कराई और सीएम गहलोत के 156 मिशन पूरा करने का दावा किया। इसका क्या मायने होता है यह तो प्रभारी स्पष्ट कर सकते हैं। 

कांग्रेस के संभागीय सम्मेलन में सचिन पायलट का नहीं आना क्या मायने रखता है। सम्मेलन में दूसरे संभागों के मंत्रियों की मौजूदगी को लेकर भी उठ रहे सवाल। प्रभारी रंधावा इन सब बातों को जानकर भी कुछ कहने से बचते रहे हैं ।  अब इसका सीधा मतलब यही है कि सीएम गहलोत और सचिन पायलट की बढ़ती दूरियों को कम कराने और दोनों को एक मंच पर लाने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं।  वे मंच से कितना ही  कह दे कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है। 

प्रभारी रंधावा जी आपको तो पता है कि गुटबाजी की  स्तर की है और आप सरकारी उड़न  खटोले में घूम घूम कर कह रहे हैं कि मैंने पूरे प्रदेश को करीब से देख लिया है और सब जगह अमन चैन शांति और पार्टी का वर्चस्व कायम है।लेकिन संभागीय सम्मेलनों में जितनी भीड़ रही है वह तो जिले के सम्मेलन से भी कम नजर आती है। खैर रंधावा जी आपकी अपनी समझ है इसके लिए तो आपको कौन समझा सकता है?

राहुल गांधी के समर्थन में जो संभागीय कार्यकर्ताओं और नेताओं के सम्मेलन हुए उसको आप अगर कामयाब बताते हैं तो निश्चित तौर पर आपके ऊपर पर भी सवाल उठेंगे। जयपुर के  संभागीय सम्मेलन में निश्चित तौर पर पायलट समर्थित मंत्री और विधायक आए जरूर लेकिन  मंच से उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया। 

खाद्य आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने यह कहकर नया संदेश देने का काम किया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को राजस्थान विधानसभा में अतिथि के तौर पर बुलाकर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने खूब मालाएं पहनाई और उन्होंने ही हमारे पार्टी के नेता राहुल गांधी को  लोकसभा की सदस्यता से निष्कासित करने का काम किया। उन्होंने कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि हमारे नेता ओम बिरला को समझ नहीं पाए और जो कुछ किया पर पार्टी के अंदर अब चर्चा का विषय है। लेकिन खाचरियावास ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर छींटाकशी की कि आपने प्रधानमंत्री के सामने तो अपने अंक बढ़ा लिए लेकिन जनता सामने अंक घट गए हैं। 

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की तबीयत नासाज होने के कारण शनिवार को कोटा और जयपुर के संभागीय सम्मेलन में वे नहीं आ सके। अब यह चर्चा भी जोरों पर है कि हाईकमान के समक्ष यह रिपोर्ट भेजी जाएगी कि प्रभारी के सामने जो कुछ घटित हो रहा है वह उन्हें डांटते नहीं है ना ही चेतावनी देते हैं कि पार्टी में मंच पर तो एकता दिखाओ  इसके बावजूद मैं मंच से बार-बार कह रहा हूं कि पार्टी में गुटबाजी नहीं है।

राजस्व मंत्री रामलाल जाट में एकता का जो संदेश दिया उसका जवाब सीधे तौर पर सचिन पायलट के समर्थित वन मंत्री हेमाराम चौधरी ने दिया कि आखिर रामलाल जाट बताएं कि उन्हें मंत्री पद से क्यों हटाया गया था और आज भी हमें बता रहे हैं कि पार्टी में एकता कैसे रहेगी। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि सचिन पायलट और हेमाराम चौधरी कांग्रेस छोड़कर जाने वाले नहीं है आपके कहने से कुछ होने वाला नहीं है ऐसे में अब आप ही बताओ कि एकता कैसे बनेगी ?

प्रभारी रंधावा जी यह भी कहते हैं कि वर्ष 2023 में विधानसभा में कांग्रेस की सत्ता कायम रहेगी और वर्ष 2024 में लोकसभा में भी कांग्रेस का वर्चस्व प्रदेश में देखने को मिलेगा। लेकिन यह बातें कितनी सही होगी इसका जवाब तो आपको आने वाला समय ही देगा रंधावा जी अपनी रणनीति बदलो और नाराज कार्यकर्ताओं नेताओं के करीब जाकर पार्टी में नया जोश पैदा करो नहीं तो जो पहले हुआ वह भी होगा !

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