Saturday, 29 August 2026

राहुल की लोकसभा सदस्यता रद्द होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल


राहुल की लोकसभा सदस्यता रद्द होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में  जनहित याचिका दाखिल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मानहानि के मामले में 24 मार्च को सूरत की कोर्ट ने दोषी करार करते हुए 2 साल की सजा सुनाई है। लोकसभा अध्यक्ष  ओम  बिरला ने इस निर्णय को संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी की लोकसभा की सदस्यता समाप्त करने का निर्णय लिया ।  इस निर्णय के साथ ही लोकसभा सचिवालय ने एक अधिसूचना जारी कर संस्था समाप्त कर दी। अब कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में जन प्रतिनिधित्व कानून के सेक्शन 8 (3) की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए  जनहित याचिका दायर की है। इस पीआईएल में मांग की गई है कि, इस सेक्शन को  खत्म किया जाए। 

जनहित में सुप्रीम कोर्ट से यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि, धारा 8(3) के तहत प्रतिनिधियों को दोषी पाए जाने के बाद उन्हें अपने आप अयोग्य घोषित नहीं किया जाना चाहिए। पीआईएल में कहा गया कि, चुने हुए प्रतिनिधि को सजा का एलान होते ही उनका जन प्रतिनिधित्व यानी सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाना असंवैधानिक है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल पीआईएल में कहा गया है कि, अधिनियम के चेप्टर-III के तहत अयोग्यता पर विचार करते समय आरोपी के नेचर, गंभीरता, भूमिका जैसे कारकों की जांच की जानी चाहिए।

जन प्रतिनिधि कानून 1951 में व्यवस्था की गई है कि,यदि किसी जन प्रतिनिधि को किसी मामले में दो साल या इससे अधिक की सजा होगी तो उसकी सदस्यता समाप्त हो जाएगी। इसके अलावा सजा पूरी होने के छह साल तक वह चुनाव नहीं लड़ सकेगा। किसी मौजूदा सदस्य के मामले में तीन महीने की छूट दी गई है।

सूरत की कोर्ट ने राहुल गांधी को मोदी सरनेम मामले में दो साल की सजा सुनाए जाने के एक दिन बाद शुक्रवार को राहुल गांधी को लोकसभा से अयोग्य घोषित कर दिया था।  गौर ने उन्हें उच्च  कोर्ट में अपील करने की अनुमति देने के लिए मामले में 30 दिन की जमानत दी गई है। राहुल ने अपनी अयोग्यता पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंदी में ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था कि, मैं भारत की आवाज के लिए लड़ रहा हूं और कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हूं।




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