


चिकित्सा मंत्री के अनुसार, स्वास्थ्य का अधिकार कानून लागू करने का उद्देश्य है कि अस्पतालों में मरीजों को उपचार के लिए मना नहीं किया जाए।
कानून में इमरजेंसी की स्थिति में इलाज का खर्चा सम्बन्धित मरीज द्वारा वहन नहीं करने की स्थिति में पुनर्भरण राज्य सरकार द्वारा किए जाने का प्रावधान रखा गया है।
विधेयक के तहत राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण लॉजिस्टिक का गठन किया जाएगा।
जिला स्तरीय प्राधिकरण का प्रावधान भी किया गया है।
बड़े अस्पतालों को राज्य सरकार द्वारा रियायती दर पर जमीनें उपलब्ध करवाई गई है।
इन अस्पतालों को राइट टू हेल्थ विधेयक के अंतर्गत जोड़ने का प्रावधान है।
राज्य के प्रत्येक निवासी को निम्न अधिकार होंगे.... रोग की प्रकृति कारण प्रस्तावित जांच और रोगी की देखभाल की जानकारी। उपचार के प्रत्याशित परिणाम, संभावित जटिलता और खच्चों की जानकारी । ओपीडी अथवा आईपीडी सेवाओं, चिकित्सा परामर्श, दवा, रोग के निदान, आपात परिवहन। और आपातकाल में रोगी की देखभाल की निःशुल्क और बिना पूर्व भुगतान के उपलब्धता । कानूनी मामलों में पुलिस को अनापत्ति या रिपोर्ट के इंतजार में उपचार में विलम्ब नहीं। रोगी को मेडिकल रिकार्ड जांच रिपोर्ट और उपचार खर्च के विस्तृत बिल की जानकारी। देखभाल और उपचार करने वाले व्यक्ति के नाम और जॉब चार्ट की जानकारी। इलाज एवं देखभाल के दौरान मरीज की गोपनीयता, एकाता और मानव गरिमा। स्वास्थ्य जांच एवं इलाज की दरों की सूचना एवं इलाज के लिए विकल्प की उपलब्धता। इलाज के दौरान अन्य अस्पताल, चिकित्सक से राय के लिए मेडिकल रिकार्ड की जानकारी। रोग की स्थिति, इलाज के बारे में रोगी को पूरी जानकारी, स्वास्थ्य केन्द्र से रेफरल परिवहन। इलाज के दौरान और उसके बाद किसी शिकायत की सुनवाई और उसका निवारण।