


राइट टू हेल्थ बिल का विरोध को लेकर सोमवार को विधानसभा प्रदर्शन करने निकले निजी डॉक्टर सेंट्रल पार्क के सामने से स्टैच्यू सर्किल पर रोक लिया। पुलिस और निजी डॉक्टर के बीच धक्का-मुक्की भी हुई और इसके बाद पुलिस ने लाठी चार्ज किया। लाठीचार्ज में कई निजी डॉक्टर और नर्स स्टाफ घायल हो गए। भाजपा विधायक दल के उप नेता राजेंद्र राठौड़ ने विधानसभा में पॉइंट ऑफ इंफॉर्मेशन माध्यम से इस मामले को उठाया और कहा कि सरकार की लाठीचार्ज से कई लोग घायल हुए हैं और उन्होंने अपनी मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू कर दिया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मामले में चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा डॉक्टर को बुलाकर बातचीत करें और मामला सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
सोमवार को प्रदेशभर के 2400 से ज्यादा प्राइवेट हॉस्पिटल संचालक सड़कों पर उतरे। सोमवार को सबसे पहले सभी डॉक्टर्स और हॉस्पिटल संचालक जयपुर के एसएमएस अस्पताल परिसर में बने जयपुर मेडिकल एसोसिएशन के सभागार में जुटे। यहां उन्होंने बिल के विरोध में अपना-अपना तर्क रखा। डॉक्टर्स दोपहर करीब 12 बजे एसएमएस हॉस्पिटल से निकले। जेएलएन मार्ग होते हुए त्रिमूर्ति सर्किल गए। यहां से नारायण सिंह सर्किल होते हुए सेंट्रल पार्क के सामने से स्टैच्यू सर्किल पहुंचे।
इस दौरान पुलिस ने सभी को करीब 1 बजे स्टैच्यू सर्किल के पास रोक लिया। डॉक्टर और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हो गई। सभी डॉक्टर्स स्टैच्यू सर्किल पर ही धरने पर बैठ गए। कुछ दिन पहले इस बिल का समर्थन करने वाली जॉइंट एक्शन कमेटी भी अब वापस इसके विरोध में उतर गई है। इस कमेटी का गठन डॉक्टरों की यूनियन ने ही किया था।
प्राइवेट हॉस्पिटल और नर्सिग सोसाइटा के सेक्रेटरी डॉक्टर्स विजय कपूर ने कहा कि हम सभी आगे थे। पुलिस वालों ने अचानक खींचकर नीचे गिरा दिया। दो तीन लाठियां मारने के बाद भगदड़ मच गई। हम नीचे गिर गए। उसके बाद का कुछ पता नहीं चला। सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो जो करना पड़ेगा करेंगे। इस पूरे मामले में जो बीच की कड़ी है। वहीं सबसे बड़ा मसला है।
एक दूसरे डॉक्टर ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान सेक्रेटरी सबसे आगे चल रहे थे। अचानक कुछ पुलिस वालों ने सेक्रेटरी पर डंडे बरसाने शुरू कर दिए। किसी ने ध्यान नहीं दिया कि ये नीचे गिरे हुए हैं। हमारी ही भीड़ आगे बढ़ रही थी। पुलिस ने हमारी कोई मदद नहीं की।