


भारतीय संस्कृति के पावन उत्सव चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भारतीय नववर्ष नव संवत्सर 2080 प्रारम्भ हो रहा है। इसके स्वागत के लिए 10 दिवसीय नव संवत्सर उत्सव बड़े ही धूमधाम से जयपुर में आयोजित किया जाएंगा।
संस्कृति युवा संस्था एवं नव संवत्सर उत्सव समारोह समिति के अध्यक्ष पं. सुरेश मिश्रा ने बताया कि 20 मार्च से 30 मार्च तक 10 दिवसीय विभिन्न कार्यक्रम नव संवत्सर उत्सव के रूप में आयोजित किये जायेगें। जिसमें 20 मार्च को नव संवत्सर के स्वागत के लिये चार सफेद अश्व छोडे जाएंगें। ये अष्व वास्तु के हिसाब से आठ दिशाओं में ईशान में खोले के हनुमानजी मंदिर, पूर्व में गलता, आग्नेय में गोनेर मंदिर, दक्षिण में सांगा बाबा, नैऋत्य में स्वामी नारायण मंदिर, पश्चिम में हाथोज हनुमान जी, वायव्य में कदम्ब डूंगरी व उत्तर में आमेर में काले हनुमान मंदिर जी के लिएं छोडे जाएगे और नव संवत्सर का अनूठे तरीके से प्रचार-प्रसार करेगें। भारतीय संस्कृति और नव संवत्सर का प्रचार करने के लिये यह श्वेत अश्व जयपुर शहर के सभी प्रमुख स्थानों से होते हुए मंदिरों में जाएंगें।
मिश्रा ने बताया कि एक जमाने में अश्व छोडने की परम्परा थी उसके माध्यम से राजा लोग अपने साम्राज्य का विस्तार करते थे। लेकिन हम जयपुर में यह अनूठा एवं अद्भुत आयोजन इस लिये कर रहे है कि जयपुर की लगभग पूरी आबादी को नव संवत्सर के प्रति जागरूक किया जा सके। इस बहाने युवाओं में कौतूहल और जाग्रति आएगी।
नवसंवत्सर उत्सव समारोह समिति के संयोजक पं. देवीशंकर शर्मा ने बताया कि इन सभी श्वेत अष्वों को कल चौड़ा रास्ता स्थित तारकेश्वर मंदिर से सुबह 10ः00 बजे रवाना करेगें। इनका विधिवत पूजन कर वैदिक रीति से किया जायेगा और विभिन्न मंदिरों के संत- मंहत उनकी आरती उतारकर रवाना करेगें।
ये अश्व 4 दिन तक आठों दिशाओं में जब घुमेंगें तो इनके साथ में समिति के कार्यकर्ता पम्पलेट बांटते हुए चलेंगे साथ ही इन अश्वों पर बैनर लगे होंगे जिन पर ‘‘नवसंवत्सर 2080 मंगलमय हो,’’ ‘‘नवसंवत्सर 2080 की हार्दिक शुभकामनाओ’’ के बैनर लगे होगें। विशेषकर युवाओं से आग्रह करेंगे कि भारतीय नव संवत्सर को धूमधाम से आयोजित करें। साथ ही इस बार विभिन्न एसएमएस, व्हाट्सअप मैसेज, होर्डिंग बैनर लगाकर पूरे जयपुर शहर में लोगो से आग्रह करेंगे कि नव संवत्सर की बधाइयां दे। 22 मार्च को जयपुर के प्रमुख मंदिरों में घंटे-घडियाल बजाकर नवभोर का स्वागत होगा एवं शाम को गोविन्द देवजी के मंदिर में महाआरती का आयोजन किया जाएगा।
पं. देवी शंकर शर्मा ने बताया कि पाश्चात्य संस्कृति के हिसाब से नववर्ष 1 जनवरी को मनाया जाता है लेकिन युवा वर्ग को अपने संस्कारों से परिचय हो इसलिये इस बार के आयोजन में युवाओं की अधिकाधीक प्रतिभागिता हो इसके लिए प्रचार किया जा रहा है। इसके लिये ‘‘नवसंवत्सर उत्सव समारोह समिति’’ का भी गठन किया गया है। ये समिति जयपुर शहर में विभिन्न मंदिरों में 20 मार्च से 30 मार्च तक विशेष पूजन एवं दीप आरती का आयोजन भी करेगी।