Saturday, 29 August 2026

डेयरी बूथ आवंटन प्रक्रिया में राज्य सरकार का हस्तक्षेप दुर्भाग्यपूर्ण,लाइसेंस कमेटी के अधीन रहे आवंटन की प्रक्रिया: पुनीत कर्णावट


डेयरी बूथ आवंटन प्रक्रिया में राज्य सरकार का हस्तक्षेप दुर्भाग्यपूर्ण,लाइसेंस कमेटी के अधीन रहे आवंटन की प्रक्रिया: पुनीत कर्णावट

ग्रेटर नगर निगम के उपमहापौर पुनीत कर्णावट ने स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जिला कलेक्टरों व निकाय आयुक्तों को 7 दिन में 5 हजार डेयरी बूथों के आवंटन प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट पेश करने संबंधी आदेशों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि स्थानीय निकायों के अधिकारों का हनन करके राज्य सरकार बूथ आवंटन प्रक्रिया का कांग्रेसीकरण करना चाहती है तथा आवंटन कमेटी में नियुक्त अफसरों के माध्यम से प्रक्रिया में भ्रष्टाचार करके बूथ आवंटन में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं एवं चहेतों को फायदा पहुंचाना चाहती है।

ग्रेटर नगर निगम के  उप महापौर  कर्णावट ने आगे कहा कि नगर निगम,नगर परिषद एवं नगर पालिका क्षेत्र में डेयरी बूथों  का आवंटन निकायों में गठित जनप्रतिनिधियों की लाइसेंस कमेटी द्वारा किए जाने की परम्परा रही है तथा यह स्थानीय निकायों का लोकतांत्रिक अधिकार भी है परन्तु राज्य की वर्तमान कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू से निकायों के आर्थिक, प्रशासनिक व लोकतांत्रिक अधिकारों पर कुठाराघात किया जा रहा है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।

ग्रेटर नगर निगम के  उप महापौर पुनीत कर्णावट ने कहा कि वर्ष 2022-23 के बजट सत्र में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के निकाय क्षेत्रों में 5 हजार डेयरी बूथों के आवंटन की घोषणा की थी। जयपुर के दोनों नगर निगमों में 1144 बूथों के लिए लगभग 35 हजार आवेदन आए थे लेकिन डेढ़ साल से डेयरी बूथ आवंटन नहीं होने से आवेदकों में निराशा व आक्रोश व्याप्त है। 

आवेदन प्रक्रिया में देरी के लिए सरकार की नीति और नियत पर सवाल खड़े करते हुए उपमहापौर पुनीत कर्णावट ने कहा कि स्थानीय निकायों की अनदेखी करके राज्य सरकार द्वारा गठित की गई आवंटन कमेटी के अफसरों द्वारा प्रक्रिया में जानबूझ कर देरी की गई जिससे अधिकांश आवेदक निराश होकर डेयरी बूथ मिलने की उम्मीद छोड़ चुके हैं। 

उन्होंने कहा कि लंबी नींद से जागी राज्य सरकार अब अपनी षडयंत्रकारी योजना के तहत चुनाव से पहले अफसरों के माध्यम से भ्रष्टाचार करके कांग्रेसी कार्यकर्ताओं एवं चहेतों पर मेहरबानी करने की कवायद कर रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि जमीन आवंटन से लेकर बूथों की नियमित मोनिटरिंग, शुल्क इत्यादि सहित समस्त प्रक्रिया स्थानीय निकायों की लाइसेंस समिति द्वारा निष्पादित की जाती है। ऐसे में लाइसेंस कमेटी के अधिकार छीनकर प्रशासनिक अधिकारी के नेतृत्व में अफसरों की कमेटी गठित करने के निर्णय से सरकार की नीति व नियत पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

ग्रेटर नगर निगम के उपमहापौर पुनीत कर्णावट ने राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि स्थानीय सरकार के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करते हुए डेयरी बूथ आवंटन प्रक्रिया जो निकायों का अधिकार क्षेत्र है उसमें अधिकारियों के माध्यम से हस्तक्षेप करने का प्रयास बंद करें।




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