


राज्य उपभोक्ता आयोग द्वारा सहारा प्राइम सिटी के विरुद्ध जारी किए गए ज़मानती गिरफ़्तारी वारंट की तामील नहीं होने के कारण अब पुलिस महानिदेशक राजस्थान का ध्यान आकर्षित किया है कि सहारा प्राइम सिटी के सभी लंबित प्रकरणों के वारंट विशेष रूप से गठित दल के द्वारा करवाई जाए।
आयोग के सदस्य रामफूल गुर्जर ने इस संबंध में जानकारी दी कि राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायाधिपति देवेंद्र कचछावाहा, सदस्य अतुलकुमार चटर्जी और सदस्य श्रीमती शोभा सिंह द्वारा पंजीयक को निर्देश दे दिए गए हैं कि रजिस्ट्रार द्वारा व्यक्तिगत तौर पर पुलिस महानिदेशक राजस्थान को इस स्थिति से अवगत कराएं जाए कि सभी लम्बित प्रकरणों के परिवादीगण मध्यम वर्ग से संबंधित हैं तथा जिन्होंने अपने गाढ़े पसीने की कमाई से अपने आवास का सपना संजोया था और भारी राशि निवेश की थी लेकिन उनका सपना साकार नहीं हुआ। ऐसे में पीड़ितों ने विवश होकर उन्हें राज्य उपभोक्ता आयोग की शरण लेनी पड़ी।
उल्लेखनीय हैं कि सहारा प्राइम सिटी के विरुद्ध लंबित धारा 27 (उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 )और धारा 72 (उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019) के अंतर्गत 115 प्रकरण लंबित है जिनमें संबंधित परिवादीगन के पक्ष में आयोग द्वारा पारित निर्णय के अनुसार करोड़ों रुपया की वसूली मय ब्याज लंबीत चली आ रही है । आयोग के सदस्यगुर्जर ने बताया कि इन प्रकरण में विगत लंबे समय से सम्बंधित विपक्षीगण अभियुक्त गण के विरुद्ध जारी ज़मानती गिरफ़्तारी वारंट लम्बे समय से तामिल नहीं होने की अवस्था में आयोग ने गंभीरता दर्शाई हैं। इससे पूर्व में भी आयोग द्वारा जारी निर्देशों की पालना में जयपुर पुलिस कमिशनर और पुलिस उप आयुक्त की तरफ़ से पत्र जारी किए गए थे।
राज्य उपभोक्ता आयोग द्वारा दिए गए निर्देशानुसार गठित विशेष दल का मुखिया अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक या उप पुलिस अधीक्षक स्तर का अधिकारी होगा एवं एक या अधिक निरीक्षक उस दल में शामिल होंगे। साथ ही पुलिस महानिदेशक राजस्थान द्वारा अपने समकक्ष पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश से भी संपर्क साधकर सभी मामलों में जारी किए गए वारंट की पालना में सक्रिय सहयोग सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं ।