


जाट महाकुंभ में आए नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश में मुख्यमंत्री बनाने और आरक्षण 27 प्रतिशत करने तथा जातिगत आधार पर जनगणना कराने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई।
विधानसभा चुनाव से पहले रविवार को जयपुर के विद्याधर नगर स्टेडियम में जाट महाकुंभ में सभी पार्टियों के नेता जुटे। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासराने समाज के नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि दो बातों का ध्यान रखें, एक तो किसी भी दूसरे समाज के खिलाफ एक भी गलत शब्द नहीं निकलना चाहिए। यह प्रण लेकर हमें यहां से जाना पड़ेगा । दूसरा अगर हम किसी की मदद कर रहे हैं तो चुपचाप करें।
उन्होंने कहा कि हमारे समाज में यह कमी है कि हल्ला करते हैं कि हम मदद करेंगे, तब तक दुश्मन सक्रिय हो जाता है और हमारे समाज के व्यक्ति की मदद नहीं हो पाती है। उन्होंने कहा कि मैं जिस हैसियत में हूं, मेरी पार्टी के नेता और मेरी पार्टी की विचारधारा से ऊपर उठकर भी मैं पहले समाज का हूं।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.सतीश पूनिया ने कहा कि जो जाट गांव में सामाजिक सद्भाव के लिए जाना जाता था, जो परिश्रम, ईमानदारी, देशभक्ति के लिए जाना जाता था, वही हमारा चरित्र और हमारी ताकत भी है। इसलिए छत्तीस कौम जो पंचायती राज चुनावाों में आपके पीछे खड़ी होती थी, उसमें फूट पैदा करने की कोशिश हुई है। समय की इस नजाकत को समझिए, बुद्धि कौशल का इस्तेमाल करिए।
उन्होंने कहा कि मैं भी चूरू जिले के छोटे से किसान के घर में पैदा हुआ। पिछले 35 वर्षों से राजनीति में हूं। मेरी मां, मेरे परिवार ने मुझे संस्कार दिए। मैं भी स्वतंत्रता सेनानी परिवार से हूं, मैंने वह सब देखा है जो एक गरीब व्यक्ति देखता है। दुख देखा, अपमान देखा, तिरस्कार देखा, विरोध देखा, संघर्ष देखा।
डॉ.पूनिया ने कहा कि जब पहली बार रेलगाड़ी से जयपुर आया तो यह समुद्र देखकर मन में कल्पना ही थी कि शायद ही शहर में मेरी जगह हो। मैं शहर और गांव की मानसिकता से लड़ा। किसान की मेहनत और इमानदारी की ताकत क्या होती है, दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी में सबसे बड़े प्रदेश का अध्यक्ष बना, यह तमाम किसानों की मेहनत और आशीर्वाद का परिणाम है।
जाट महाकुंभ में पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि जब मंडल आयोग लागू हुआ तो मेंने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था। मैं मंडल आयोग के खिलाफ इस्तीफा देने वाला पहला जाट सांसद था। उन्होंने कहा कि उस वक्त हमारी बिरादरी का सवाल था। मैं अपनी बिरादरी के लिए कुछ भी करने को तैयार हूं। समाज के प्रोग्राम में आने में शर्म नहीं आती है, जब भी समाज का प्रोग्राम में बुलाते हैं, मैं सहर्ष आता हूं।
राजस्थान एग्रो इण्डस्ट्रीज डवलपमेंट बोर्ड के अध्यक्ष रामेश्वर डूडी ने जाट महाकुंभ मंच से जाट मुख्यमंत्री की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि अभी नबंर वन सीट की बात हो रही थी। नंबर वन की सीट कौनसी है, नंबर वन की सीट मुख्यमंत्री की है। राजनीति के लोगों को यह बोलते हुए डर भी लगता है। रामेश्वर डूडी को डर नहीं लगता। आज मैं मांग करता हूं कि राजस्थान का आने वाला मुख्यमंत्री किसान का बेटा, जाट का बेटा होना चाहिए।
डूडी ने कहा कि हमें गांव-गांव में तेजाजी के मंदिर बनाने चाहिए, तभी कुछ एकता हो पाएगी। जाटों को टांग खिंचाई की आदत छोड़नी चाहिए। अगर टांग खिंचाई नहीं छोड़ी तो तरक्की नहीं कर पाओगे। नंबर वन की कुर्सी तभी मिलेगी जब एक दूसरे की टांग खिंचाई करना बंद करेंगें
परिवहन राज्यमंत्री बृजेंद्र ओला ने कहा कि जाट समाज कभी अहसान फरामोश नहीं हो सकता। जाटों को आरक्षण दिलाने में कोई अगर किसी एक व्यक्ति का योगदान है तो वह है कर्नाटक के किसान नेता एचडी देवगौड़ा का देवगौड़ा ने आयोग बनाया। वे आयोग नहीं बनाते, रामुवालिया और कॉमरेड हरकिशन सिंह सुरजीत काम नहीं करते तो आपको कोई आरक्षण देने वाला नहीं था। गजट में छप गया था, लेकिन चुनावों की आचार संहिता लग गई और वह अटक गया। बाद में अटल बिहारी वाजपेयी ने उसे ढाई साल बाद लागू किया।
जाट महाकुंभ में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के पुत्र और बारां-झालावाड़ सांसद दुष्यंत सिंह भी शामिल हुए। दुष्यंत सिंह अपनी मां और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का संदेश लेकर कार्यक्रम में आए थे। दुष्यंत सिंह को भाषण देने के लिए बुलाया गया, लेकिन तबीयत खराब होने का हवाला देकर उन्होंने बोलने से इनकार कर दिया। इसके बाद मंच से वसुंधरा राजे का संदेश पढ़कर सुनाया गया। राजे ने अपने संदेश में सालासर में देव दर्शन कार्यकगम में व्यस्त होने को नहीं आने का कारण बताया।
जाट महाकुंभ में दादू दयाल धाम, नरैना के प्रमुख संत ने संकल्प दिलवाए। महाकुंभ के दौरान पेड़ को परिवार का मेंबर मानने और जीवों की रक्षा करने का संकल्प दिलवाया गया। शादियों में फिजूलखर्ची रोकने, प्राकृतिक और जैविक खेती की तरफ लौटने, पशुपालन और खेती को बिजनेस से जोड़ने, उद्योग और व्यापार में समाज की हिस्सेदारी बढ़ाने, बागवानी और फलदार पेड़ लगाने का भी संकल्प दिलाया गया। इस संकल्प के तहत हर व्यक्ति को एक पेड़ लगाकर उसका ध्यान रखने को कहा गया है। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी, कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, राजस्व मंत्री रामलाल जाट, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रा सिंह, किसान महासभा के संयोजक महेंद्र सिंह टिकैत, सरकारी उप सचेतक महेंद्र चौधरी, भाजपा के सांसद सुमेधानंद सरस्वती, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया, विजय पूनिया कांग्रेस के सुरेश चौधरी सहित विभिन्न नेता मौजूद रहे।