


पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के निर्वाचन क्षेत्र टोंक की बनास नदी में धड़ल्ले से न केवल लीज क्षेत्र से बाहर बजरी खनन हो रहा बल्कि लीज धारक द्धारा लीज शर्तो का भी उल्लंघन किया जा रहा है।जिससे बनास नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है।
बनास नदी में बजरी लीज कर्मियों द्धारा बड़ी मशीनों से बजरी खनन होने से जहां लोगो का रोजगार छीन गया है वही बनास नदी की बजरी खत्म होने के कगार पर है।इतना ही नही बनास नदी में प्राकृतिक जल स्त्रोतो व जलदाय विभाग के कुंओं के नजदीक से बजरी का उठाव किया जा रहा है।वही बनास नदी जी प्राकृतिक धारा को भी अपनी सुविधा के मुताबिक मिट्टी व कंक्रीट की पाल बना करके मोड़ दिया गया है ।जब कि नियमो के मुताबिक नदी या कोई भी प्राकृतिक जल स्त्रोत को न तो किसी भाग में बांटा जा सकता न ही उसके बहाव की धारा को मोड़ा जा सकता। गया है।वही इसके विपरीत बनास नदी में बजरी लीज धारक द्धारा बजरी वाहनों को निकालने के लिए मिट्टी व कंक्रीट की सड़क बनाई गई है।नियमो के मुताबिक खनन के दौरान नदी के सक्रिय प्रवाह क्षेत्र में किसी भी प्रकार बदलाव या हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता वही नदी की बहती धारा को किसी भी तरह से परिवर्तित नहीं करना होता है। तीन मीटर से ज्यादा गहराई से या नदी भूजल स्तर से अधिक गहराई से रेत निकालने पर पाबन्दी है। रात के समय खनन प्रतिबंधित है। आश्चर्य है, इन नियमों से खनन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण समिति,पर्यावरण समिति, जिला प्रशासन अनभिज् नही है बल्कि जानबूझ करके आंखों पर पट्टी बांधे हुए है।
बजरी नदी के पानी को स्वच्छ रखने में मददगार होती है लेकिन अत्यधिक बजरी खनन से आस पास के इलाके का भूजल स्तर गिर रहा है।