


राजस्थान गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक विजय सिंह बैसला ने कहा है कि ईआरसीपी लागू हो या नही यह महत्त्वपूर्ण नही है बल्कि पहली प्राथमिकता लोगो को पानी मिलें, यह आवश्यक है।इस योजना में 10 साल का समय लगेगा लेकिन आवश्यकता आज है।
उन्होंने कहा कि ईआरसीपी का मुद्दा 4 साल पूर्व उठाया था क्योंकि 13 जिलों में पानी की बड़ी समस्या है हालात यह है कि 12 बीघा जमीन का मालिक किसान आज जयपुर में बेलदारी करने को मजबूर है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में बढ़ती हत्याओं एवं स्मेक की घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण है।उन्होंने कहा कि टोंक,करौली,सवाईमाधोपुर सहित राज्य में नशावृत्ति बढ़ रही है।
बैसला ने कहा कि पूर्वी राजस्थान में न तो कोई बड़ी इंड्रस्टीज है न ही कोई शिक्षा के बड़े केंद्र है।पूर्वी राजस्थान में पीने का पानी नही है,डांग क्षेत्र में 23 करोड़ का बजट था सिर्फ ढाई करोड़ ही खर्च हुआ है।आखिर विकास में राजस्थान क्यों पिछड़ा,पैसा कहां गया।
उन्होंने कहा कि एमबीसी समाज विधानसभा चुनाव में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अपना राजनीतिक दबदबा दिखाएगा इसमे कोई दो राय नही है। राजस्थान में 75 विधानसभा क्षेत्रो में बाहुल्य है, किसी भी पार्टी से कोई एमएलए बनाए हमे 40 विधायक एमबीसी के चाहिए।सभी को बहुमत से प्रतिनिधित्व की आवश्यकता है।
ओवेसी की पायलट को टोंक छोड़ करके अब गुर्जर बाहुल्य सीट से चुनाव लड़ने की चुनोती मामले में कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है। राजस्थान विधानसभा में 40 एमबीसी विधायकों में पायलट भी शामिल होंगे।
बैसला ने शुक्रवार को टोंक में गुर्जर समाज के प्रमुख व्यक्तियों की बैठक भी ली जिसमे आगामी विधानसभा चुनाव में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की भूमिका सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति टोंक के संयोजक एवं विधानसभा प्रभारी रामलाल संडीला, मोरपाल ,राजेन्द्र गुर्जर,मोहन लाल सहित काफी कार्यकर्ता मौजूद थे।