


अखिल कांग्रेस की राजनीति में प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा ने बिना सोचे समझे यह कह दिया कि सरकारी मुख्य सचेतक और जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी को 25 सितंबर की घटना को लेकर ही एक पद से हटाया गया है। यह कार्रवाई उसी का हिस्सा है। अनुशासन समिति के सदस्य तारिक अनवर द्वारा यह कहकर चौंका दिया है कि अभी तक प्रदेश के तीनों नेताओं के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की है। ऐसे में यह अब चर्चा का विषय बन गया है कि किसके कहने पर प्रभारी रंधावा ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह बयान दिया।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सरकारी निवास पर शनिवार को महाशिवरात्रि के पूजन में शामिल होने गए प्रभारी रंधावा, पंजाब के प्रभारी और कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की लंबी बातचीत के बाद क्या कुछ हुआ यह तो नहीं पता चला । लेकिन दोपहर में प्रभारी रंधावा ने दिल्ली जाने से पहले पत्रकारों को यह जानकारी देकर एक नया राजनीतिक संदेश देने का काम किया । जब संदेश दिल्ली तक पहुंचा तो निश्चित तौर पर वहां हलचल हुई और अनुशासन समिति के सदस्य तारीक अनवर को यह कहने को मजबूर होना पड़ा कि प्रदेश में 25 सितंबर को हुई घटना के बाद संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल, सरकारी मुख्य सचेतक और जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी और आरटीडीसी के चेयरमैन धर्मेंद्र राठौर के खिलाफ मामला लंबित है और कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सीएम गहलोत के समर्थकों ने इससे पहले भी यह चर्चाएं शुरू कर दी थी कि हाईकमान ने तीनों नेताओं को माफ कर दिया है उसके बाद संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल को यह कहना पड़ा कि इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं हुई है और मामला अनुशासन समिति के पास लंबित है। आप फिर से नई चर्चा ने राजनीतिक तौर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आने वाले समय में क्या कुछ हो सकता है ! स्वयं डॉ. महेश जोशी ने यह कहकर खुशी जाहिर की कि हाईकमान ने उनके इस्तीफे को मंजूर कर लिया है और अगर यह इस्तीफा कार्रवाई के बाद और माना जाता है उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने साथ ही कहा कि हाईकमान जो भी निर्देश देगा वह उसकी पालना करेंगे।
रायपुर में कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन होने वाला है ऐसे में वहां पर जाने वाले अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि के नामों का फैसला भी अभी तक नहीं हो पाया है। प्रभारी रंधावा कह चुके हैं कि आपसी तालमेल से नामों की घोषणा होगी। यही कारण है कि प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों, ब्लॉक अध्यक्ष और मंडल अध्यक्षों की घोषणा भी फिलहाल रुकी हुई है। प्रभारी रंधावा यह तो दावा कर रहे हैं कि वह प्रदेश के उलझे हुए मामलों को आपसी सहमति से सुलझाने का काम कर रहे हैं । उन्होंने यह भी कहा कि सचिन पायलट की कोई नाराजगी नहीं है लेकिन वह अब तक सीधे तौर पर सीएम गहलोत से उनकी मुलाकात कराने में सफल नहीं हो पा रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि हाईकमान कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन से पहले राजस्थान के मसले में कोई निर्णय ले सकता है! लेकिन अभी तक फैसला नहीं होने से प्रदेश की राजनीति में विभिन्न प्रकार की चर्चाएं चल रही है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे की ओर से कोई संदेश अभी तक नहीं आया है ऐसे में राजनीतिक तौर पर प्रदेश में कुछ हलचल मची हुई है और कहा जा रहा है कि शीघ्र कुछ होने वाला है।
यही कारण है कि सचिन पायलट को पीटीआई न्यूज एजेंसी के समक्ष अपनी बात रखनी पड़ी और जब बात सामने आई तो हलचल पैदा हुई निर्णय फिलहाल नहीं हुआ है। जबकि प्रभारी ने बयान लेकर एक नया संदेश देने का जो प्रयास किया उससे कुछ राजनीतिक हलचल तो हुई लेकिन रात तक इसका स्पष्टीकरण आने से अब एक नया माहौल बनने लगा है कि प्रभारी को हाईकमान के अनुसार संदेश देने में सफल नहीं हो पा रहे हैं । प्रदेश में कांग्रेस में क्या हालचाल होगी और क्या परिणाम आएंगे यह सभी को इंतजार होने लगा है। अब आप चाहे कुछ भी कहो लेकिन रंधावा की बातों पर जो विश्वास पहले होने लगा था अब उस पर सवाल खड़े हो जाने से उनकी प्रतिष्ठा पर भी विपरीत प्रभाव देखने को मिलेगा।
प्रदेश के कहीं प्रभावशाली नेता जो कि सीधे तौर पर राहुल और प्रियंका गांधी से जुड़े हुए हैं उन्हें यह कहने का मौका मिलने लगा है कि प्रभारी रंधावा हाईकमान के विश्वास की जगह विवादित होते नजर आ रहे हैं। प्रदेश में सचिन पायलट तो सीधे तौर पर राहुल प्रियंका के करीब है इसके अलावा गुजरात के प्रभारी विधायक डॉ रघु शर्मा, पंजाब के प्रभारी विधायक हरीश चौधरी, आश्रम के प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और बीज निगम के अध्यक्ष धीरज गुर्जर, मेवात बोर्ड के अध्यक्ष और राष्ट्रीय सचिव जुबेर खान सहित विभिन्न नेता भी अब पहले से अधिक सक्रिय हो गए हैं।यह बात भी सही है कि सीएम गहलोत ने अपनी स्थिति को मजबूत रखने के लिए राज्यसभा से प्रभावशाली नेता संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल, मुकुल वासनिक, रणजीत सुरजेवाला और प्रमोद तिवारी को दिल्ली भेज रखा है उन्हें इसका लाभ भी राजनीतिक तौर पर मिल रहा है।
फिलहाल प्रभारी रंधावा की जयपुर यात्रा क्यों हुई और वे विवादित होकर बिना कोई निर्णय के वापस लौटे गए हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश की राजनीति में कुछ नया होने वाला है जिसकी जानकारी अब धीरे-धीरे आने लगेगी। प्रभारी रंधावा ने इतना ही कहा कि हाईकमान जो कुछ कहता है मैं उसकी संदेश को प्रदेश में देने का काम करता हूं लेकिन उनका संदेश जब सही नहीं निकला तो अब वह आगे क्या कुछ संदेश देंगे इस पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। चलो अब जो कुछ हुआ उस पर चर्चा तो जरूर होगी लेकिन आने वाले समय में प्रभारी रंधावा की घोषणा है और बातें सही बनी रहे इसका उन्हें ध्यान रखना ही पड़ेगा। नहीं तो वह भी विवादित होकर यहां से कब चले जाएंगे किसको कोई पता नहीं चलेगा ।