


विधायक खरीद-फरोख्त से जुड़े मामले में एडिशनल सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का वॉयस सैंपल देने की एसीबी की रिवीजन याचिका को खारिज कर दिया है। इससे पहले निचली अदालत भी शेखावत के ऑडियो के मामले में वॉयस सैंपल देने की याचिका को खारिज कर चुकी है।
पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट खेमे की बगावत के समय जुलाई 2020 में सीएम अशोक गहलोत खेमे ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर विधायक खरीद-फरोख्त का आरोप लगाते हुए कुछ ऑडियो जारी किए थे। एक ऑडियो में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और दिवंगत विधायक भंवरलाल शर्मा के बीच बातचीत का दावा था। इसके आधार पर गजेंद्र सिंह, संजय जैन और दिवंगत भंवरलाल शर्मा के खिलाफ एसीबी में मामला किया गया था।
रिवीजन याचिका में एसीबी की ओर से अधिवक्ता संत कुमार ने कहा कि निचली कोर्ट ने गलत तरीके से एसीबी की एप्लिकेशन को खारिज किया है। निचली अदालत ने जिस आधार पर वॉयस सैंपल लेने के संबंध में एसीबी के प्रार्थना-पत्र को खारिज किया है, वह प्रावधान ब्लड सैंपल और हैंड राइटिंग के सैंपल लेने के मामले में लागू होता है। जबकि यह मामला वॉयस सैंपल लेने का है। जांच एजेंसी गिरफ्तार किए बिना भी वॉयस सैंपल ले सकती है।
केंद्रीय मंत्री शेखावत के अधिवक्ता विवेक राज बाजवा ने इसका विरोध करते हुए कहा कि प्रकरण में एसीबी के पास ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि वह शेखावत को गिरफ्तार करे और कानूनन बिना गिरफ्तारी वॉयस सैंपल नहीं ले सकते हैं। इसके अलावा एसीबी की ओर से पेश यह रिवीजन याचिका सही नहीं है।
निचली अदालत का प्रकरण में यह अंतरिम आदेश था। इस आदेश के खिलाफ सीधे हाईकोर्ट में आपराधिक याचिका पेश की जानी चाहिए थी। इसलिए एडीजे कोर्ट रिवीजन याचिका को नहीं सुन सकती है। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने एसीबी की रिवीजन याचिका को खारिज कर दिया है।