


महिला बाल विकास मंत्री ममता भूपेश पोषाहार वितरण में घोटाले की जांच और उसने दोषी कर्मचारियों को खिलाफ कार्रवाई करने के प्रस्ताव की फाइल को लेकर महिला बाल विकास सचिन का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे आईएएस अधिकारी डॉ समित शर्मा इतनी नाराज हुई कि उन्होंने उसे पद से हटा दिया ।
महिला बाल विकास मंत्री ममता भूपेश में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के माध्यम से कार्मिक विभाग को पत्र लिखकर समित शर्मा से अतिरिक्त चार्ज हटाने का पत्र लिखा। किस पत्र पर कार्मिक विभाग ने उच्च स्तरीय निर्देशों के बाद महिला बाल विकास विभाग के सचिव का कार्यभार अब सहकारिता विभाग की प्रमुख सचिव श्रेया गुहा को सौंप देने के आदेश जारी कराएं। इससे पहले एक जनवरी-2023 से यह कार्यभार डॉ. शर्मा संभाल रहे थे।
महिला व बाल विकास विभाग की ओर से प्रदेश में 28 लाख बच्चों को नि:शुल्क पोषाहार वितरित किया जाता है। यह पोषाहार प्रदेश भर के 62 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों द्वारा दिया जाता है। इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार ने मिलकर एक हजार करोड़ रुपए का बजट जारी किया हुआ है।
जनवरी-23 में धौलपुर के कलेक्टर अनिल कुमार जैन ने विभाग के सचिव डॉ. समित शर्मा को बताया कि बहुत से केंद्रों पर पोषाहार के तहत 25-30 प्रतिशत सामग्री ही पहुंच रही है, जबकि भुगतान 100 प्रतिशत सामग्री का उठाया जा रहा है। कलक्टर जैन ने मामले की जांच की और बहुत से सरकारी कर्मियों को इस घोटाले के लिए जिम्मेदार ठहराया। कलक्टर ने जांच रिपोर्ट महिला बाल विकास विभाग के कार्यभार संभाल रहे प्रमुख सचिव डॉ. समित शर्मा के पास जयपुर भिजवाई।
कलेक्टर धौलपुर की जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉ. शर्मा ने महिला बाल विकास मंत्री ममता भूपेश को ऐसे सरकारी कर्मियों को निलंबित किए जाने की सिफारिश के साथ फाइल भेजी, लेकिन महिला बाल विकास मंत्री ममता भूपेश ने वो फाइल यह कह कर वापस भेज दी कि जांच दोबारा करवाई जाए। इस पर डॉ. शर्मा ने महिला बाल विकास मंत्री ममता भूपेश को यह लिखकर वापस फाइल भेजी कि जांच एक जिला कलक्टर स्तर पर करवा ली गई है, ऐसे में दोबारा जांच की कोई आवश्यकता ही नहीं।
डॉ. समित शर्मा ने महिला बाल विकास मंत्री ममता भूपेश को पूरे प्रदेश में पोषाहार खरीद में इस तरह की शिकायत मिलने की जानकारी भी भेजी। इसके बाद यह फाइल दोबारा डॉ. शर्मा के पास नहीं आई। इसके बाद महिला व बाल विकास विभाग का कार्यभार डॉ. शर्मा से वापस ले लिया गया। इसके बाद डॉ.सुमित शर्मा को हटाए जाने के मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा जोरों पर है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस मामले में वितरण करने वाले ठेकेदार कलजीत राणावत व्यापक स्तर पर पोषाहार वितरण में घोटाला किया है। आखिर महिला बाल विकास मंत्री ममता भूपेश इस घोटाले के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के पक्ष में क्यों नहीं है यह सवाल उठता है । मौजूदा स्थिति में विधानसभा का सत्र चल रहा है ऐसे में यह मामला विधानसभा में भी आ सकता है। यही कारण है कि महिला बाल विकास मंत्री ममता भूपेश किसी भी तरह इस मामले को दबाने के प्रयास में जुटी हुई है।