


भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने राज्य बजट 2023-2024 को लेकर आय-व्ययक अनुमान वर्ष, बजट 2023-24 पर वाद विवाद के दौरान विधानसभा में संबोधन में कहा कि इस बजट की बहस में नेता प्रतिपक्ष के नाते सदन की गरिमा गुलाबचन्द कटारिया जी बढ़ाते थे। जिनका इस सदन में और राजस्थान की राजनीति में एक बड़ा लंबा अनुभव रहा। मैं मानता हूं कि यह हम सबका और सदन का सौभाग्य है, राजस्थान की राजनीति में काम करने वाले उन कार्यकर्ताओं का सौभाग्य है कि वह सर्वोच्च संवैधानिक पद पर विराजेंगे। मैं, कटारिया साहब को सदन की ओर से बहुत शुभकामनाएं और बधाई देता हूं।
आज इसी भूमिका में हमारे उप नेता, प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ को होना था। लेकिन वह मुझसे पहले बोल चुके थे। मैं उम्र में, अनुभव में और मेरी अग्रणी बैंचेज में उस लिहाज से सबसे छोटा हूं। मेरी स्थिति उस परीक्षार्थी की तरह है कि मैं परीक्षा दे रहा हूं और ऊपर शिक्षक मेरी कॉपी को जांच रहा होगा। आदरणीय कटारिया साहब की विरासत की जगह मैं हो सकता है अपनी भूमिका के साथ कितना न्याय कर पाऊंगा?
बजट सरकार का एक गोपनीय दस्तावेज होता है। जिसकी एक मर्यादा होती है लेकिन मैं देख रहा था, विचित्र तरीके से राजस्थान की सरकार का यह बजट कुछ अनूठा था। मुझे बताया गया कि जगह-जगह देखा, बचत, राहत और बढ़त। सवा करोड़ रुपये उन विज्ञापनों में खर्च किए गए। यह भी जानकारी मिली खोजते-खोजते कि कोई पीआर एजेंसी ने भी छवि चमकाने का भरपूर प्रयास किया।
आप यदि बजट की शुरूआत करेंगे तो मुझे लगता है कि सबसे पहले तो बजट की गोपनीयता भंग की गई। मर्यादाओं का उल्लंघन किया गया, इस तरह से बजट की ब्रांडिंग और मार्केटिंग कभी नहीं देखी गई। चलिए यह जो गया लेकिन जो घटनाक्रम यहां हुआ, मैं किसी की मानहानि नहीं करना चाहता लेकिन कम से कम इस सदन में और इस सरकार में जो देश में कभी नहीं हुआ वो आज क्यों हुआ, उसकी पृष्ठभूमि में जाना पड़ेगा।
2018 के चुनाव की घोषणाएं, चुनाव घोषणा पत्र, 5 अभिभाषण और 5 बजट, यदि मैं इसको यह कहूं कि यह बचत, राहत और बढ़त नहीं है, यह चपत है राजस्थान की जनता को, यह खपत है राजकोष की और यह डूबत है राजस्थान की, जो हालात आज पैदा कर दिए गए, दावे बड़े-बड़े किए गए, मैं उल्लेख करूंगा इस बात का लेकिन मैं मेरे मित्रों को निवेदन करना चाहूंगा कि अभी हैप्पीनेस इंडेक्स की बात चल रही थी, पहले बोले वाले मेरे मित्र ने कहा, पर मुझे लगता है कि अगर हैप्पीनेस इंडेक्स की यदि सबसे ज्यादा जरूरत किसी को है और जो सबसे ज्यादा प्रभावित है, वो मेरे सामने वाला पक्ष है।
डॉ. सतीश पूनिया ने कहा कि यहां का बेरोजगार, नौजवान और युवा। अभी मेरे से पहले बोलने वाले साथी गिना रहे थे। मैं देख रहा था, इनके भाषण के दौरान, हिन्दुस्तान की बेरोजगारी दर है 7 प्रतिशत और राजस्थान की बेरोजगारी दर है 28.3 प्रतिशत। कम और ज्यादा क्या होता है, आप आकलन करें। अध्यक्ष महोदय, दिक्कत यह है कि राजस्थान में पिछले चार बरसों में 10 हजार नौजवानों ने आत्महत्याएं की हैं, जिसमें 2400 विद्यार्थी हैं। 70 लाख बच्चों ने परीक्षा दी। 18-18 परीक्षाएं। बात कर रहे थे गरीब की, किसान की, उसका बेटा तैयारी करने के लिए शहर में आता है, कोचिंग सैंटर में जाता है, उसके मां-बाप पेट काटकर उसे कोचिंग सेंटर भेजते हैं, ताकि नौकरी के सपने देखें और उन्हें पूरा कर सके, लेकिन जब वह परीक्षा केन्द्र पर जाता है तो पता लगता है कि पेपर लीक हो गया।
महात्मा गांधी पक्षधर नहीं थे। महात्मा गांधी अंग्रेजी स्कूलें खोल तो दीं, लेकिन फैकल्टी नहीं है, अंग्रेजी पढ़ाने वाले नहीं हैं। मुख्य मंत्री युवा सम्बल, इसके भी आप आंकड़े देखियेगा। राजस्थान सिलिकोसिस नीति, ये कुछ मैंने सलेक्ट किये हैं उसमें, आपने इसमें कुछ कॉम्पेंसेशन देने का तो कारण कर दिया, लेकिन आपके डॉक्यूमेंट में, आपकी नीति और नीयत में कहीं भी इसका उल्लेख नहीं है कि सिलिकोसिस को रोकने के लिए क्या करेंगे।
डॉ. सतीश पूनिया ने कहा कि मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना। मुख्यमंत्री चले गये। मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना, राजस्थान में पिछली भारतीय जनता पार्टी की भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना थी। उसके बाद में देश की सरकार आयुष्मान भारत योजना लायी।उसका 600 रुपया भारत सरकार देती है, एक हजार रुपया आप देते हो लेकिन फोटो अपनी है क्योंकि पीआर एजेंसी ने सलाह ऐसी दी है।
डॉ. सतीश पूनिया ने कहा कि मैं बजट की उन बारीकियों पर आऊंगा जो राजस्थान की नई पीढ़ी से, राजस्थान की तरुणाई से ताल्लुक रखती हैं। राजस्थान की जो ड्रॉप-आउट है उसको कम करने के लिए आपने स्कूल वापसी के लिए पहले प्रावधान किया था 300 करोड़ रुपये और अभी हुआ है 229 करोड़ रुपये। कम क्यों किया इसका कोई पता नहीं।
33 जिलों के 2.29 लाख 10 से 15 वर्ष की आयु के बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और जो शिक्षा पर खर्च है वह 6 प्रतिशत है, लेकिन प्रदेश के 32 प्रतिशत स्कूलों में बिजली नहीं है, 70 प्रतिशत प्राइमरी स्कूल तो बिना बिजली के ही हैं और 9 प्रतिशत में न पीने का पानी है, न शौचालय हैं। उच्च शिक्षा की स्थिति यह है कि आपने पहले 40 खोले, फिर 48 खोले और उसके बाद 31 कॉलेज खोले। मैं अभी मंत्री को सुन रहा था, हमारे किसी सदस्य ने प्रश्न पूछा कि भवन नहीं है तो मंत्री जी बड़ी सहजता से कह रहे हैं, भले हैं, मित्र हैं मेरे, बोले कोई धर्मशाला देख लेंगे।
डॉ. सतीश पूनिया ने कहा कि वर्ष 2022 में 6795 करोड़ रुपये का पेयजल के लिए प्रावधान किया, 2023 में 5352 करोड़ कर दिये। ये पैसे कम होने से सीधे-सीधे 50 लाख लोग प्रभावित होंगे।जल जीवन मिशन, देश के प्रधानमंत्री प्रतिबद्ध हैं कि हर घर तक जल जाए और राजस्थान के एक करोड़ लोगों तक जाना है। आपकी देश में 30वीं रैंकिंग है और अभी तक केवल 32 लाख घरों तक आपने यह काम किया है। भारत की सरकार पैसा दे रही है और आपने कहा कि हमारे वश की नहीं है इसलिए योजना का समय बढ़ाया जाए। 2024 तक आपको ये एक करोड़ कनेक्शन देने थे पर आपकी रफ्तार कहती है कि 60 लाख से ज्यादा नहीं दे पाएंगे। यह कमी किसकी है?
खेल और युवाओं के लिए खूब सारी बात हुई। मैंने अभी संयोग से देखा कि बाड़मेर के शिव के कानासर गांव की बेटी मूमल क्रिकेट खेल रही थी और 36 डिग्री स्ट्रोक्ट्स लगा रही थी। रेत में घरेलू बैट से खेलते हुए मैंने देखा, उसका वीडियो शेयर किया, उससे बात की और मेरे पास तत्काल जो देने का था तथा मैंने क्रिकेट किट पहुंचाया। उसकी एक बहन पहले से क्रिकेट खेलती है।
बाड़मेर के शिव के कानासर जैसे गांव में इस तरीके से खेल की प्रतिभाएं यदि पनपती हैं तो मैंने उससे फोन पर पूछा कि तुम्हें यहां खेलने के लिए क्या चाहिए तो उसने कहा कि हमारे यहां खेल का मैदान नहीं है पर आपकी घोषणा तो 2018 में हो चुकी थी कि आप हर पंचायत पर खेल का मैदान खोलेंगे, कोचेज की भर्ती करेंगे। लेकिन जिस तरीके से पुराने खिलाड़ी जलील होते हैं, मेडलिस्ट जलील होते हैं कि उनका भत्ता समय पर नहीं मिलता, उनका बकाया समय पर नहीं मिलता, उनको कोई एप्रिसिएशन नहीं है। आप दूसरे प्रदेशों से सीख लीजिये, पंजाब और हरियाणा से सीख लीजिये।
जो बजट के प्रावधान 2021 और 2022 के थे वे यदि आप देखेंगे तो समझ में आ जाता है कि उसका एग्जिक्यूशन आप इनते कम समय में कैसे करेंगे। 10990 करोड़ रुपये का कृषि और सम्बद्ध सेवाओं के लिए 2021 में प्रावधान किया और 2022 में 3645 करोड़ का। ग्रामीण विकास के लिए 17486 और 12012 करोड़ रुपये, क्षेत्रीय विकास के विशेष कार्यक्रमों के लिए 52 हजार और जीरो, कोई प्रावधान नहीं। सिंचाई और बाढ़ के लिए 3750 करोड़ रुपये और 1765 करोड़ रुपये, ऊर्जा के लिए 24 हजार करोड़ रुपये और 15905 करोड़ रुपये, उद्योग और खनिज के लिए 1389 और 1143 करोड़।
डॉ. सतीश पूनिया ने कहा कि केन्द्र सरकार से करों का हस्तान्तरण राज्य सरकार के अनुमान से अधिक रहा है और संशोधित अनुमानों में, 2022-23 में यह वृद्धि 8019 करोड़ रुपये की देखी गयी है। बात केन्द्र सरकार की नहीं है, प्रदेश की है कि वहां का जो फाइनेंशियल मैनेजमेंट है और यह तो आपको ही तय करना है कि आप इसको किस तरीके से ठीक करेंगे। पर माननीय अध्यक्ष महोदय, जिन बातों का मैंने उल्लेख किया, जिक्र किया उसमें एलोकेशन भी मैटर करता है।
डॉ. सतीश पूनिया ने कहा कि आपने कृषि विभाग के लिए एलोकेट किये 4127 करोड़ रुपये 2022-23 में और 2023-24 में 3306 करोड़ किये। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना पर 350-325, सहकारिता के लिए जो बहुत बड़ा सेक्टर है, जो देश और प्रदेश की आर्थिक नींव को गति देता है वह 2256 करोड़ रुपये-1483 करोड़ रुपये। प्रधानमंत्री आवास में 7146-1000, विद्युत के लिए 25260-25191, जिलों की सड़कों के लिए 510-150, स्कूल वापसी में 300-229, मैं उसका उल्लेख कर पाया।