


प्रदेश के ट्रेजरी सिस्टम काे खत्म करने के लिए विधानसभा के बजट सत्र में लाए जाने से पहले ही राजस्थान अकाउंटिंग सिस्टम अमेंडमेंट बिल-2023’ काे लेकर विवादित हो गया है। राज्यपाल कलराज मिश्र ने इस मामले में छपी खबराें के आधार पर ही सरकार काे पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा है।
राजभवन ने 14 फरवरी काे सरकार काे पत्र लिखकर प्रकाशित खबराें व सीएजी के उस आदेश का भी हवाला दिया है, जिसमें केंद्र सरकार के डीपीसी एक्ट का हवाला देते हुए राज्य सरकार काे कहा गया था कि अकाउंटिंग सिस्टम में बदलाव करना संविधान सम्मत नहीं है। यही नहीं प्रदेश में दो मंत्रियों सहित पक्ष-विपक्ष के 80 से ज्यादा विधायकाें और कुछ सांसदाें ने भी राज्य सरकार काे पत्र लिखकर इस ट्रेजरी सिस्टम काे जारी रखने की मांग की है।
राज्यपाल के प्रमुख सचिव सुधीर कुमार ने कहा किइस मामले काे लेकर हमने राज्य सरकार काे पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है। अभी तक सरकार की तरफ से जवाब नहीं आया है।
राज्य सरकार के इस विधेयक को लेकर कर्मचारी, पेंशनर और नेता तीनों विरोध कर रहे हैं। मौजूदा स्थिति में 3 हजार से ज्यादा लेखा सेवा के कर्मचारी ट्रेजरी में काम करते हैं, जाे तहसील स्तर तक खुले हैं। ट्रेजरी बंद हुई ताे ये कार्यालय बंद हाेंगे। उनके समायोजन को लेकर भी एक नया विवाद खड़ा होगा।
पेंशनर्स अभी उन्हें काेई भी समस्या हाेती है ताे ज्यादातर समय उन्हें ट्रेजरी कार्यालय में ही समाधान मिल जाता है। यदि ये बंद हाे जाएंगी ताे उन्हें किसी भी परेशानी पर जयपुर ही आना हाेगा। नेताओं के लिए भी यह मुद्दा वाेट से जुड़ा है। यदि ट्रेजरी बंद हाेती है ताे स्थानीय स्तर पर उन्हें इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।