


पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने 25 सितंबर को विधायक दल की बैठक का बहिष्कार करने के मामले में जिम्मेदार नोटिस देने तीन नेताओं के खिलाफअब तक पार्टी हाईकमान द्वारा कार्रवाई नहीं करने के मामले को पीटीआई को दिए साक्षात्कार में उठाया । उन्होंने कहा कि अगर पीएम नरेंद्र मोदी प्रदेश में आक्रमक रूप से प्रचार कर रहे हैं। वे अब तक प्रदेश में दो जगह जनसभाएं भी कर चुके हैं ऐसे में अगर बगावत करने वाले नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई उन्होंने पार्टी हाईकमान से उनके खिलाफ शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की।
पायलट ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी ने हाईकोर्ट में दायर शपथ पत्र में इसका उल्लेख किया गया है कि 81 विधायकों के इस्तीफे मिले और कुछ ने व्यक्तिगत तौर पर इस्तीफे सौंपे थे। शपथ पत्र में यह भी कहा गया कि कुछ विधायकों के इस्तीफे फोटोकॉपी थे और बाकी को स्वीकार नहीं किया गया क्योंकि वे विधायकों ने अपनी मर्जी से नहीं दिए गए थे। यह एक कारण था, जिसके आधार पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने इस्तीफे अस्वीकार किए। पायलट ने कहा कि- ये इस्तीफे स्वीकार नहीं किए गए क्योंकि अपनी मर्जी से नहीं दिए गए थे। अगर वे अपनी मर्जी से नहीं दिए गए थे तो ये किसके दबाव में दिए गए थे ? क्या कोई धमकी थी, लालच था या दबाव था। यह एक ऐसा विषय है, जिस पर पार्टी की ओर से जांच किए जाने की जरूरत है।
पायलट ने कहा कि पिछले साल जयपुर में कांग्रेस विधायक दल की बैठक का बहिष्कार करके तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश की अवहेलना करने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई में बहुत ज्यादा देरी हो रही है। हमें अगर राज्य में हर पांच साल में सरकार बदलने की परंपरा बदलनी है तो कांग्रेस से जुड़े मामलों पर शीघ्र फैसला करना लगा होगा। जिन नेताओं को नोटिस दिए गए थे उसमें कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस लीडरशिप ही इसका सही जवाब दे सकते हैं कि मामले में फैसला लेने में बहुत ज्यादा देरी हो रही है। विधायक दल की बैठक तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश पर बुलाई गई थी और ऐसे में बैठक नहीं होना पार्टी के निर्देश की अवहेलना थी।'
पायलट ने कहा कि 'विधायक दल की बैठक 25 सितंबर को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा बुलाई गई थी। यह बैठक नहीं हो सकी। बैठक में जो भी होता वो अलग मुद्दा था, लेकिन बैठक ही नहीं होने दी गई। जो लोग बैठक नहीं होने देने और विधायक दल की पैरेलल बैठक बुलाने के लिए जिम्मेदार थे, उन्हें अनुशासनहीनता के लिए नोटिस दिए गए थे। मुझे मीडिया से यह जानकारी मिली कि इन नेताओं ने नोटिस के जवाब दे दिए हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की तरफ से अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। मुझे लगता है कि एके एंटनी के नेतृत्व वाली अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति, कांग्रेस अध्यक्ष और पार्टी नेतृत्व ही इसका सही जवाब दे सकते हैं कि निर्णय लेने में इतनी ज्यादा देरी क्यों हो रही है ?