


राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ प्रदेश महासमिति की बैठक 13 फरवरी को जयपुर में आयोजित की गई। इस बैठक में कर्मचारी नेताओं ने सीएम अशोक गहलोत द्वारा बजट में कर्मचारियों के लिए की गई घोषणाओं की समीक्षा की गई। कर्मचारी नेताओं ने 2 मार्च को जयपुर में रैली और विधानसभा पर प्रदर्शन करने का निर्णय किया।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सीएम गहलोत ने बजट से पहले कर्मचारियों के साथ संवाद जरूर किया लेकिन उसके अनुरूप घोषणा नहीं की गई। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सीएम गहलोत को वेतन विसंगतियां दूर करने, सामंत और हेमराज कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप वेतनमान देने,रोडवेज कर्मचारियों को राज्य कर्मचारी पाषित करना ,प्रहरियों को आरएसी / पुलिस के बराबर वेतन देने,एन.टी.एस. को लागू करना औरसभी विभागों में हर वर्ग के पदो को नियुक्ति देना,टी.एस.पी एस.पी. और तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानान्तरण सहित 21 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन दिया गया था । लेकिन सीएम ने बजट में कर्मचारियों की किसी भी मांग को नहीं माना है।
सीएम गहलोत ओपीएस को लेकर देशभर में राजनीति खेल खेल रहे हैं। जबकि ओपीएस के पैसों का भुगतान नहीं होगा केंद्र सरकार स्पष्ट कह रही है। राज्य सरकार ने भी राज्य कर्मचारियों को आज तक जी.पी.एफ. घाटों का आवंटन नहीं किया है। मात्र ओपीएस लागू करना छलावा है। इसी को मददेनजर रखते हुए साधना कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है। प्रदेश एकीकृत के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में 21 सदस्यों की समिति का गठन किया गया है। आंदोलन शुरू करने के लिए 15 फरवरी को सभी कर्मचारी काली पट्टी बांधकर बजट की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। बैठक में फैसला किया गया कि जयपुर में 2 मार्च को कर्मचारियों की रैली आयोजित कर विधानसभा का घेराव किया जाए । रैली के माध्यम से ही सरकार को किस बात के लिए चेतावनी दी जाएगी कि उनकी मांगें नहीं पूरी की गई तो कर्मचारी आंदोलन करेगा ।