


प्रतिपक्ष ने बजट को लेकर हुए विवाद पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत माफी मांगे इस मांग को लेकर विधानसभा में जोरदार हंगामा किया। जब प्रतिपक्ष के बाद नहीं मानी गई तो उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष डॉ जोशी ने मामले को शांत करने के लिए पूरे सदन से इस मामले को लेकर माफी मांगी जिसे प्रतिपक्ष ने स्वीकार नहीं किया। हंगामे की स्थिति को लेते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने फिर से विधानसभा की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी। उसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने फिर से विधानसभा शुरू होने के साथ ही बजट पढ़ना शुरू कर दिया।
प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया ने स्पष्ट तौर पर कहा कि मुख्यमंत्री को माफी मांगने चाहिए। जब मांग पूरी नहीं हुई तो प्रतिपक्ष वेल में आकर हंगामे बाजी करने लगा। भाजपा के अध्यक्ष और विधायक डॉ. सतीश पूनिया ने सदन में अपनी बात रखनी चाहिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ जोशी ने उन्हें यह कहते हुए रोका कि आप अपने दल के नेता जरूर है लेकिन पहली बार विधानसभा में चुनकर कर आए हैं ऐसे में आसन के आदेश के अनुपालन करनी पड़ेगी । इस बात को लेकर विवाद होता रहा और विधानसभा अध्यक्ष डॉ जोशी ने सीएम गहलोत को अपना बजट भाषण शुरू करने के आदेश दे दिया। सीएम गहलोत जी फिर से बजट भाषण शुरू करने की कोशिश करने लगे उन्होंने प्रतिपक्ष से आग्रह किया कि वह अपने स्थान पर शांत होकर बैठ जाएं बजट एक महत्वपूर्ण है और पूरा प्रदेश इसको सुनने के लिए बेताब है। मुख्यमंत्री के आग्रह को प्रतिपक्ष ने स्वीकार नहीं किया इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने अपनी बात रखने का आग्रह आसन से किया। डॉक्टर जोशी शांति धारीवाल को बात रखने के लिए कहा इसका प्रतिपक्ष ने जोरदार विरोध किया और हंगामा शुरू कर दिया।मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज विधानसभा में पुराना बजट भाषण पढ़ दिया। करीब 6 मिनट तक वे पुराना बजट पढ़ते रहे, तभी जलदाय मंत्री महेश जोशी ने आकर सीएम के कान में कुछ कहा और वो ठिठक गए। गहलोत का भाषण रुका, विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जब किसी विधानसभा में पुराना बजट भाषण पढ़ा गया हो और इस पर जोरदार हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी।
विपक्षी सदस्य भारी हंगामा करते हुए सदन के वेल में आ गए। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने पुराना बजट पढ़ा है। भारी हंगामे के कारण सदन आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव ऊषा शर्मा को तलब किया और अफसरों की लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की।
दोबारा सदन की कार्रवाई शुरू हुई तो सीएम अशोक गहलोत ने सफाई दी। कहा, 'बजट भाषण की इस कॉपी में फर्क हो तो बताइए। एक एक्स्ट्रा पेज लग गया गलती से। मैं एक पेज गलत पढने लग गया। लीक होने का सवाल कहां से आ गया?'
राजस्थान में पहली बार बजट भाषण के दौरान सदन की कार्यवाही स्थगित की गई, करीब आधे घंटे तक कार्यवाही स्थगित रही। दैनिक भास्कर ने इसकी पड़ताल की तो सामने आया कि मुख्यमंत्री भाषण की शुरुआत की तो वह शेर पिछले भाषण में नहीं था, लेकिन इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना की घोषणा पिछले साल ही की गई थी।
जब गहलोत ने दो पॉइंट हूबहू पढ़े तो देख सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी ने सीएम के कान में आकर कुछ कहा। इसी बीच विपक्ष के नेता और उपनेता ने सवाल उठाया कि सीएम पुराना भाषण पढ़ रहे हैं और बजट लीक हो गया है।। इस पर हंगामा शुरू हो गया। बीजेपी विधायकों ने वेल में आकर हंगामा शुरू कर दिया तो हंगामा बढ़ने लगा तो स्पीकर ने 11 बजकर 12 मिनट पर आधे घंटे के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने कहा कि जो कुछ घटनाक्रम हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण है, उसमें हमने पास्ट में पता लगाया। सीएम ने जो भाषण दिया है, वह ठीक नहीं होगा। आज की घटना से आहत हुए हैं। मानवीय भूल होती रहती है। इस पूरी कार्यवाही को सदन से बाहर किया जाता है।
नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि कुछ मिनट तक गलत पढ़ने के बाद तीसरे व्यक्ति ने आकर बताया कि गलत पढ़ रहे हैं। बजट लीक हुआ है, बजट गोपनीय होता है और इसकी कॉपी सीएम के अलावा किसी दूसरे के पास कैसे पहुंच गई। सीएम को तीसरे आदमी ने आकर बताया, यह बजट किसी तीसरे व्यक्ति को कैसे मालूम पढ़ा। सदन का मान रखना चाहते हैं तो इस बजट को दूसरे दिन अलग से पेश किया जाए। आज की घटना से लोकतंत्र शर्मसार हुआ है।