


हरियाणा प्रांत ग्राम विकास प्रमुख कुलदीप ने कहा कि खेल लोगों को अपनी क्षमताओं का बेहतरीन इस्तेमाल करने, सहकारी टीम प्रयास का हिस्सा बनने, जीतने और हारने का आनंद एवं कई बार दुख अनुभव करने के बहुत से अवसर उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने कहा कि साथ में खेल में होड़ करना बस मजे की बात होती है। प्रतियोगिता लोगों को अपने जीवन में विपरीत स्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करती है और चुनौती और परिवर्तन की सूरत में डटकर मुकाबला करना सिखाती है।
हरियाणा प्रांत ग्राम विकास प्रमुख कुलदीप रविवार को सोनीपत जिले के मेहंदीपुर गांव में दो दिवसीय चल रहे समरस गंगा ग्राम उत्सव के समापन में बोलते हुए हरियाणा प्रांत ग्राम विकास प्रमुख कुलदीप ने कहा कि गांव के लोगों को आपसी भाईचारा और गांव की खुशहाली के लिए काम करने का संकल्प दिलाते हुए कहा कि भारत में और वो भी गांव में जन्म होना ही सौभाग्य की बात है, हम सबको इस पर गर्व करना चाहिए।
उन्होंने कहां कि हरियाणा प्रांत में यह पांचवा ग्राम उत्सव का आयोजन है इससे पहले अलग अलग जिलों में चार ग्राम उत्सव आयोजित हो चुके है। समरस गंगा ग्राम उत्सव से गांवों की कायाकल्प में सुधार हुआ है। ग्रामीणों में जैविक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ी है। ग्रामीणों में भाईचारा व सामाजिक समरसता भी बढ़ी है।
ग्राम उत्सव में मुख्य अतिथि के नाते राई विधायक मोहन लाल बड़ौली ने कहा कि रहने के लिए गांव से बेहतर कोई स्थान नहीं हो सकता। शहर चाहे कितने ही आधुनिक हो जाएं पर गांव की बराबरी नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि जापान जैसे दुनिया के सबसे स्वस्थ देशों के स्वास्थ्य का राज भी गांवों में ही है। गांव के तालाब-जोहड़, खेत-क्यार आज भी जितनी शांति प्रदान करते हैं दूसरी कोई चीज नहीं करती। आज देश की तस्वीर बदल गई है। भारत का नाम दुनिया भर में आदर के साथ लिया जाता है। ग्राम समिति मेरा गांव मेरा तीर्थ, ग्राम पंचायत सरपंच द्वारा विधायक के समक्ष गांव की फिरनी को पक्का करवाना, गांव में ई-लाइब्रेरी, ओपन जिम का निर्माण व नालियों की व्यवस्था इत्यादि मांगे रखी। जिस पर विधायक ने सभी मांगे पूरी करवाने का आश्वासन दिया।
उत्तर क्षेत्र सह बौद्धिक प्रमुख रोशन लाल ने कहा कि गांव की खुशहाली के लिए नशे से दूर रहने और समरसता के लिए संकल्प लेकर काम करना चाहिए। इस गांव की माटी ने हमें बहुत कुछ दिया है। हमारे लालन-पालन से लेकर हमारी सामाजिक पहचान तक में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। यह गांव ही है जो हमें हर परिस्थिति में संघर्ष करते रहने और आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भारत गांवों में बसता है। स्वदेशी की संभावना व महत्व गांवों में ही है। भारतीय शिक्षा, प्राकृतिक खेती एवं गांव आधारित उद्योगों से ही गांवों का विकास संभव है। हमें गांव के पाश्चात्य चश्मा उतारकर भारतीय दृष्टि से देखने की आवश्यकता है। जिससे गांवों का सर्वांगीण विकास हो और गांवों के विकास से प्रदेश व देश का विकास होगा।
उन्होंने कहा कि हम सब ग्रामीणों को तीन बातों को अपने स्वभाव से निकालकर आगे बढ़ना होगा, जिनमें सबसे पहले गाली, दूसरे नम्बर पर गुस्सा और तीसरे स्थान पर घृणा आती है। यदि ये तीन चीजें हम छोड़ देते हैं तो स्वतः ही हमारा समाज संगठित और एकता की मिसाल बन जाएगा।
बाहर खाप प्रधान जयभगवान अंतिल ने कहा कि समय के साथ व्यक्ति को उन्नति करनी चाहिए, पर अपनी सांस्कृतिक धरोहर को भी संभाल कर रखना चाहिए। हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को बताना है कि हमारी संस्कृति कितनी महान और गौरवशाली है।
खेलों के साथ ग्रामीणों ने हरियाणवी गीतों और कई प्रकार की प्रतियोगिताओं का आनंद लिया समरस गंगा ग्राम उत्सव में आए गांवों के हरियाणवी कलाकारों ने जहां अपनी ऐसी प्रस्तुतियां दी कि ग्रामीण झूम उठे। कार्यक्रम में एक अनोखी प्रतियोगिता हरियाणवी पहनावे को लेकर भी रखी गई। इसमें गांव की महिलाएं और पुरुष पूरे हरियाणवी परिधान में दिखे। उत्सव में प्रतिभावान विद्यार्थियों और प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया गया। प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय व तृतीय रहने वाली टीमों को मोमेंटो देकर पुरष्कृत किया गया।