


जयपुर, अलवर, पाली, अजमेर सहित प्रदेश के कई शहरों में अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम और राजीव गांधी पुनर्वास योजना के तहत बनाए गए 7030 मकान खाली पड़े हैं। शहरी इलाके से बाहर बने होने के कारण इसे लेने में लोगों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
अब ये खंडहर हो चुके हैं। इनके रख-रखाव पर भी सरकार को भारी खर्चा करना पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने अहम निर्णय लिया है। मल्टी स्टोरी ये ईडब्ल्यूएस-एलआईजी फ्लैट्स 200-300 रुपए प्रति महीना के किराए पर दिए जाएंगे। इसकी उच्च स्तरीय निर्देश के बाद अधिकारियों ने रणनीति बनाना शुरू कर दिया हैं। इसके लिए नए दिशा निर्देश तैयार करने के बाद आवेदन मांगे जाएंगे।
स्वायत्त शासन निदेशक ह्रदेश शर्मा ने बताया- पिछले दिनों जयपुर विकास प्राधिकरण सहित प्रदेश की दूसरी शहरों के नगर सुधार न्यास, विकास प्राधिकरण और शहरी निकायों ने एक प्रस्ताव बनाकर इन मकानों के बेचने की गाइडलाइन बनाने के लिए सरकार से मांग की थी। इस पर उच्च स्तर पर काफी चर्चा के बाद इन मकानों को किराये पर देने का फैसला किया । ताकि मकानों का रखरखाव और उनका उपयोग भी हाे सके ।
प्रदेश में जितने भी मकान खाली पड़े हैं, उसमें आधी संख्या से ज्यादा मकान गहलोत सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में बनवाए थे। तब सरकार ने गरीब तबके के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी लॉन्च करके आवास विकास संस्थान के जरिए प्रदेशभर में निजी बिल्डर्स से ये फ्लैट्स बनवाए थे। उस समय भी ये शहर सीमा से बहुत दूर थे, जिसके कारण इनमें आवेदन भी बहुत कम आए थे।
अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी के तहत बने ईडब्ल्यूएस, एलआईजी के मकानों के अलावा गहलोत सरकार ने जयपुर में 5279 बड़ी संख्या में राजीव गांधी आवास योजना के तहत मकान बनाए थे। जवाहर नगर, कठपुतली नगर (22 गोदाम) सहित अन्य जगहों पर बड़ी संख्या में कच्ची बस्तियों के परिवारों को इन मकानों में शिफ्ट करना था। जेडीए ये काम नहीं कर पाया। इस कारण अब ये मकान भी खाली पड़े खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। इसके अलावा दौसा में 116, बालोतरा शहर में 76, अलवर शहर में 364, अजमेर शहर में 184 पाली शहर में 502, प्रतापगढ़ शहर में 129,भिवाड़ी अलवर में 104 और और टॉक में 276 मकान खाली पड़े हुए हैं।
ये मकान 3 लाख रुपए तक की सालाना आय वाले परिवारों को किराए पर दिए जाएंगे। इसके साथ ही सरकार ने ये प्रावधान भी रखा है कि अगर कोई किराएदार 10 साल तक मकान में रहता है। उससे मकान का बकाया पैसा लेकर फ्लैट हमेशा के लिए दे दिया जाएगा।
सरकार जिन मकानों को किराए पर दे रही हैं, वे वन और टू बीएचके हैं। ईडब्ल्यूएस कैटेगिरी के फ्लैट्स वन बीएचके के हैं। इनका सुपर बिल्टअप एरिया करीब 380 वर्गफीट है। एलआईजी के टू-बीएचके फ्लैट्स का बिल्टअप एरिया करीब 500 से 550 वर्गफीट का है। डीएलबी डायरेक्टर ह्रदेश शर्मा ने बताया कि अभी निर्णय हुआ है। आवेदन कब से लिए जाएंगे, यह अभी तय नहीं है। इसके लिए पूरी नियमावली बनेगी, इसके बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अगर तय संख्या से ज्यादा आवेदन आएंगे तो आवंटन लॉटरी के माध्यम से होगा।
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