


सचिन पायलट समर्थक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विधायक दीपेंद्र सिंह शेखावत ने दबाव में दिए गए इस्तीफों की घटना पर सवाल उठाते हुए हाईकमान से जांच करवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि 'मैं नहीं जानता कि किसका दबाव था, लेकिन शपथ पत्र दिया है कि दबाव था तो यह जांच का विषय है और इसकी जांच होनी चाहिए।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शेखावत ने कहा कि जिस तरह की बातें उठ रही हैं, वो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। मैं हाईकमान में विश्वास रखता हूं और मुझे कांग्रेस के बड़े नेताओं पर भरोसा है कि वे सब देखकर आगे कदम उठाएंगे।' उन्होंने कहा कि विधायकों के इस्तीफे के प्रकरण को लेकर जो घटनाक्रम चला है, वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। जिन विधायकों ने इस्तीफे दिए थे, अब कहा जा रहा है कि मर्जी से नहीं दिए।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शेखावत ने कहा कि जिस तरह का घटनाक्रम चला, उससे सबको तकलीफ हुई है। हाईकमान इसका संज्ञान लेगा, जांच की बात हो रही है। जो हुआ ऐसा, मैंने पहले कभी नहीं देखा। पिछले 50 साल से मैं भी राजनीति कर रहा हूं, ऐसा कभी नहीं देखा। कांग्रेस की यह परंपरा नहीं रही है।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शेखावत ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफे तो मर्जी से दिए जाते हैं। दूसरी बात इस्तीफे पर फैसला करना स्पीकर के विवेक पर निर्भर है, स्पीकर जो फैसला करे, वह फाइनल होता है। अब तक इस तरह के मामले कोर्ट में नहीं गए। कोर्ट और विधानसभा दोनों की अपनी-अपनी मर्यादा है। अपने दायरे में रहकर बात होती है। जहां तक दबाव का सवाल है, किसका दबाव था, कहा गया है कि दबाव था तो यह जांच से ही पता लग
सकता है।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शेखावत ने कहा कि भाजपा का तो खुद का एक सदस्य कांग्रेस विधायकों के साथ इस्तीफा दे रहा हैं। भाजपा तो राजनीतिक षड्यंत्र करके कामयाब नहीं हो सकेगी। अब पार्टी को नुकसान वाली चीज इसलिए नहीं रही कि सब सेटल हो गया।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शेखावत ने कहा कि अब जो होना था, वह सब होकर सेटल हो गया। अब सरकार कैसे बने, इस पर काम करने की जरूरत है।
मैं यह मानता हूं कि सदन में जो चुनकर आता है वह खुद के विवेक से काम करता है। नियमों में यह प्रावधान है कि दबाव या प्रलोभन कोई दे तो उसके लिए अलग प्रावधान है।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शेखावत ने कहा कि उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने गहलोत समर्थक विधायकों के इस्तीफों पर फैसला नहीं होने पर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने जब जवाब मांगा तो स्पीकर के जवाब से पहले ही 30 दिसंबर से लेकर 10 जनवरी के बीच 81 विधायकों ने इस्तीफे वापस ले लिए।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शेखावत ने कहा कि विधायकों के इस्तीफे वापस लेने के बाद हाईकोर्ट में विधानसभा सचिव ने जवाब दिया। इस जवाब में लिखा गया कि विधायकों ने अपनी मर्जी से इस्तीफा नहीं दिया था, इसलिए इन्हें मंजूर नहीं किया।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शेखावत ने कहा कि इसे दबाव में इस्तीफे देने का नरेटिव बना। विधानसभा सचिव के जवाब में यह खुलासा भी हुआ था कि 81 विधायकों में से 5 विधायकों ने इस्तीफों की फोटोकॉपी विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी को दी थी। भाजपा से निष्कासित विधायक शोभारानी कुशवाह का नाम भी इस्तीफा देने वालों में था।