Saturday, 29 August 2026

केंद्रीय बजट में मनरेगा बजट में 33 प्रतिशत की कटौती से ग्रामीण लोगों में निराशा: रमेश मीणा


केंद्रीय बजट में मनरेगा बजट में 33 प्रतिशत की कटौती से ग्रामीण लोगों में निराशा: रमेश मीणा

ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री रमेश मीणा ने कहा कि ग्रामीण परिवेश के गरीब लोगों को रोजगार देने की महात्मा गांधी नरेगा योजना में केंद्रीय बजट में 33 प्रतिशत की कटौती किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे ग्रामीण परिवेश के लोगों में खासी निराशा है। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना गांवों के विकास और ग्रामीण लोगों के रोजगार की सबसे महत्वपूर्ण योजना है। पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में प्रारंभ की गई इस योजना में कटौती करना गरीबों पर कुठाराघात है।

पंचायत राज मंत्री मीणा ने कहा कि प्रदेश में लोगों की मांग थी कि जितने दिन का रोजगार भारत सरकार द्वारा मिल रहा है उससे ज्यादा काम मिले। इसी को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के लिए वर्ष 2022-23 की बजट घोषणा में मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने मनरेगा के अंतर्गत 100 दिनों के अतिरिक्त 25 दिन का रोजगार देने की घोषणा की है। इसके लिए 750 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि इस संपूर्ण राशि को राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है। वहीं केंद्र सरकार द्वारा योजना की राशि में कटौती की गई है।

पंचायत राज मंत्री मीणा ने कहा कि प्रदेश में नरेगा के तहत 2 लाख 9 हजार 434 लोगों को 100 दिन का रोजगार दिया जा चुका है। 25 दिन के अतिरिक्त रोजगार के लिए लगभग 83 हजार लोगों के जॉब कार्ड बन गए हैं और 53 हजार 221 श्रमिकों ने काम करना शुरू कर दिया है। श्री मीणा ने बताया कि प्रदेश में मनरेगा के तहत पौधशाला निर्माण, जल स्त्रोतों के निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं।

पंचायत राज मंत्री मीणा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री श्री गिरिराज सिंह से गांवो के विकास को प्रगति देने और काम मिलने की महत्वपूर्ण योजना मनरेगा के बजट पर पुनर्विचार करने की अपील की।






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