


मुख्यमंत्रीअशोक गहलोत के समर्थन में 25 सितंबर को कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों के इस्तीफों के मामले में विवाद को लेकर अब एक नया मोड़ आ गया है। अब भाजपा 6 विधायकों ने इस्तीफों के लिए दबाव बनाने का आधार बनाकर कांग्रेस सरकार के 4 मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ विधानसभा सचिव महावीर प्रसाद शर्मा के समक्ष विशेषाधिकार हनन के 6 प्रस्ताव पेश किया है। 25 सितंबर को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी के सामने पेश होकर बाकी विधायकों के इस्तीफे सौंपने वाले छह मंत्री-विधायकों पर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाया है।
भाजपा विधायक दल के उप नेता राजेंद्र राठौड़ ने शून्यकाल के दौरान स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से इस्तीफे के मामले में विशेषाधिकार हनन लगाने का मामला उठाना चाहा। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने उन्हें इस प्रस्ताव पर इजाजत नहीं दी और उन्होंने कहा कि वे विधानसभा सचिव से मिलकर विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव प्रस्तुत करें तो उसके बाद विचार किया जाएगा ।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी के निर्देश के बाद अब उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव सौंपा है। संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के खिलाफ भाजपा विधायक अशोक लाहोटी ने और सरकारी मुख्य सचेतक और जलदाय मंत्री डॉ.महेश जोशी के खिलाफ रामलाल शर्मा ने विशेषाधिकार हनन को नोटिस दिया है। भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी ने मंत्री रामलाल जाट, अनिता भदेल ने सरकारी उप मुख्य सचेतक महेन्द्र चौधरी और जोगेश्वर गर्ग ने कांग्रेस विधायक रफीक खान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन को नोटिस दिया है।
भाजपा ने इस नोटिस में विधानसभा सचिव महावीर प्रसाद शर्माके हाईकोर्ट में दिए जवाब को ही आधार बनाया है, जिसमें मर्जी से इस्तीफे नहीं देने का जिक्र है। भाजपा का तर्क है कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. जोशी के सामने पेश होने वाले छहों मंत्री और विधायकों ने बाकी 75 विधायकों पर इस्तीफे देने के लिए दबाव बनाया जो एक विधायक के विशेषाधिकार का सीधा हनन है।
निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा के विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। इस मुद्दे पर अब विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी को फैसला करना है। अब भाजपा के विधायकों ने मंत्री-विधायकों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव विधानसभा सचिव महावीर प्रसाद शर्मा को सौंपा है, जिसमें इस्तीफा को ही आधार बनाया है।