


जयपुर ग्रेटर नगर निगम जयपुर के तीनों पार्षदों को राज्य सरकार ने तत्कालीन आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव के साथ किए दुर्व्यवहार के मामले में पद से बर्खास्त किया था। इस बर्खास्तगी के आदेशों को बुधवार को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया। ऐसे में अब तीनों बर्खास्त पार्षद एक बार फिर पार्षद बनेंगे। हाईकोर्ट जयपुर में बुधवार को जस्टिस इंद्रजीत सिंह की एकलपीठ ने ये आदेश जारी किया।
पार्षदों की ओर से सीनियर एडवोकेट आरएन माथुर सहित एडवोकेट आरके डागा व अखिल सिमलोट ने कहा कि मामले में प्रार्थियों को सरकार ने सुनवाई का कोई मौका नहीं दिया है। सरकार का ऐसा करना प्राकृतिक न्याय के सिद्दांतों का उल्लंघन है। इसी मामले में हाईकोर्ट पहले भी मेयर सौम्या गुर्जर को बर्खास्त करने वाले आदेश को रद्द कर चुका है। ऐसे में प्रार्थियों का मामला व तथ्य भी पूर्व के मामले के समान ही हैं। इसलिए उन्हें बर्खास्त करने वाले आदेश को रद्द किया जाए और वापस पद पर बहाल किया जाए। अदालत ने प्रार्थियों की बहस को सुनकर उन्हें बर्खास्त करने वाला आदेश रद्द कर दिया।
सरकार ने 6 जून 2021 को सबसे पहले इन सभी को निलंबित कर दिया था। इन पार्षदों को तत्कालीन नगर निगम ग्रेटर के कमिश्नर यज्ञमित्र सिंह देव के साथ मारपीट, धक्का-मुक्की और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के मामले में दोषी मानते हुए निलंबित किया था। इसके बाद सरकार ने इन तीनों ही पार्षदों के साथ मेयर सौम्या गुर्जर के खिलाफ न्यायिक जांच शुरू करवा दी थी।
स्वायत्त शासन निदेशालय की ओर से पिछले साल 22 अगस्त को आदेशों जारी करके वार्ड 72 से भाजपा के पार्षद पारस जैन, वार्ड 39 से अजय सिंह और वार्ड 103 से निर्दलीय शंकर शर्मा को पद से बर्खास्त किया था। इन तीनों ही पार्षदों को सरकार ने न्यायिक जांच में दोषी पाए जाने के बाद बर्खास्त किया था। सरकार से जारी आदेशों के बाद इन तीनों पार्षदों पर अगले 6 साल तक चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य घोषित कर दिया था।