


विधानसभा में मंगलवार को जब शून्यकाल के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा को विधानसभा सदस्यों के इस्तीफे के मामले को लेकर रखे गए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव को सदन में लाने को लेकर प्रतिपक्ष ने विरोध जताया। इस मामले को लेकर प्रतिपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. जोशी को विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने पर आपत्ति जताई और कहा कि पहले हमारी बात सुनी जाए । इस पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. जोशी ने उनकी आपत्ति को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि नियम 157 मैं यह स्पष्ट लिखा है कि अगर विधानसभा अध्यक्ष जाए तो विशेषाधिकार हनन सदन में लाने की अनुमति प्रदान कर सकता है। इस नियम के तहत ही मैं आज विधानसभा में संयम लोढ़ा को उनके प्रस्ताव को लाने की अनुमति दे रहा हूं ।
प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी को नियम 160 का हवाला दिया और कहा कि इसके तहत भी कोई नई व्यवस्था है। डॉ. जोशी ने प्रतिपक्ष नेता गुलाबचंद कटारिया को स्पष्ट तौर पर कहा कि मैं विधानसभा का संचालन नियमों के तहत कर रहा हूं ऐसे में कोई सदस्य अपनी मनमर्जी नहीं चला सकता है। उन्होंने नियम 157 का हवाला दिया और कहा कि इसके तहत मुझे पूरा अधिकार है कि मैं विशेषाधिकार हनन को सदन में रखने के लिए अनुमति प्रदान करो। उन्होंने कहा कि अभी विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव रखने की अनुमति दी जा रही है इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है । ऐसे में प्रतिपक्ष के सदस्यों को अभी बोलने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रस्ताव पर कोई चर्चा होगी तो निश्चित तौर पर प्रतिपक्ष को उनके विचार रखने का पूरा अधिकार दिया जाएगा । विधानसभा अध्यक्ष डॉ. जोशी और प्रतिपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक बावजूद डॉ. जोशी ने प्रतिपक्ष की सभी मांगों को खारिज करते हुए निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा को विशेषाधिकार हनन मामले को सदन में रखने की अनुमति प्रदान कर दी।
निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि मैं नियम 157 के तहत विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव प्रस्तुत कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव के तहत मैं बताना चाहता हूं कि संविधान में विधायिका और न्यायपालिका को स्पष्टअधिकार दिए रखे हैं। लेकिन सदन के वरिष्ठ सदस्य ने विधानसभा को कमजोर करने का काम किया है और जो विधानसभा में निर्णय किया जा सकता था उससे पहले वह मामले को लेकर हाईकोर्ट में चले गए। इससे निश्चित तौर पर विधानसभा की कार्यप्रणाली कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट कैसे विधानसभा को निर्देशित कर सकता है कि कि वह किस प्रकार से अपनी कार्यप्रणाली को चलाएं। उन्होंने ऐसे सदस्य के खिलाफ कार्रवाई करने का निवेदन किया।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने संयम लोढ़ा के विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव रखे जाने के बाद कहां की विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव अभी रखा गया है इस पर मैं सोच समझकर निर्णय लूंगा। इसके बाद उन्होंने विधानसभा की अन्य कार्रवाई प्रारंभ कर दी।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. जोशी ने कहा कि मैं आज विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव सदन में रखने के पीछे मेरा एक ही मकसद है कि सदस्यों को यह पता चले कि विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव कैसे लाया जाता है और कैसे अनुमति मिलती है। उन्होंने कहा कि मैं नियमों के अनुपालन करते हुए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया हूं और मुझे पता है कि इसको किस प्रकार से विचार के लिए रखा जाता है और क्या निर्णय होता है। जब यह स्थिति उत्पन्न होगी तो मैं निश्चित तौर पर प्रतिपक्ष को उनकी बात रखने का पूरा अवसर प्रदान करूंगा। ऐसे में मुझ पर प्रतिपक्ष या रोक नहीं लगाई कि मैं नियमों के तहत सदन नहीं चला रहा।