


जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दरबार हॉल में शनिवार को लता मंगेशकर के बारे में गुलजार साहब ने कई बातें साझा कीं, जिनके बारे में लोग नहीं जानते थे।
गुलजार ने कहा कि मैंने लताजी के लिए 'मेरी आवाज ही पहचान है' गाना लिखा था। यह मैंने उनके ऑटोग्राफ देने के स्टाइल के लिए लिखा था। ताकि वे जब भी कहीं ऑटोग्राफ दें, तो वे लिखें कि मेरी आवाज ही पहचान है। आज ये गाना उनका ऑटोग्राफ ही बन गया है। हमारी इंडस्ट्री में गाने वाले तो बहुत आए, लता जी जैसा न कोई था, न कोई होगा। उनकी आवाज के अलावा भी पहचान थी।
गुलजार ने कहा कि लताजी हर आदमी के जीवन का हिस्सा बन गई थी। यह लोगों को भी नहीं पता था। सुबह पूजा के समय लता जी का गाना बजता है। शादी की रस्मों में भी उनका गाना सुनाई देता है। सही मायने में शादियां लता जी के गानों के बिना अूधरी लगती हैं। होली आई तो उनका गीत, रक्षाबंधन पर बहन उनके गीत के साथ भाईयों के कलाई पर राखी बांधती है। लता जी हर त्योहार का हिस्सा हैं। ऐसा उनके अलावा कोई और नहीं कर पाया।