Saturday, 29 August 2026

राजनीति में कोई भी विवाद हो पर सचिन पायलट के लिए सीएम गहलोत सोच समझकर बोलना चाहिए : शशि थरूर


राजनीति में कोई भी विवाद हो पर सचिन पायलट के लिए सीएम गहलोत सोच समझकर बोलना चाहिए : शशि थरूर

सचिन पायलट को नकारा-निकम्मा, गद्दार-कोरोना कहने पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को नसीहत दी और कहा कि जब हम अपने साथियों के बारे में बोल रहे हैं तो सोच समझकर बोलना चाहिए। मैंने विरोधियों को भी ऐसे शब्द नहीं कहे। 

थरूर शनिवार को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मुझे राजनीति में 14 साल  हो गए है। मैंने किसी के बारे में कभी भी ऐसा कुछ कहने या उकसाने की कोशिश नहीं की। मैं राजनीति में कभी भी कीचड़ कुश्ती नहीं करना चाहता। यही सोचकर मैंने काफी मुद्दों को अवॉइड किया।

शशि थरूर ने कहा कि  मैं  अपने साथियों से यही गुजारिश करता हूं कि अपने ही भाई-बहनों के बारे में ऐसा कहना अच्छा नहीं है। हमें अपने मतभेदों को मिटाने की कोशिश करनी चाहिए। लोगों के अलग-अलग विचार भी हो सकते हैं। इसे कहने के दूसरे तरीके भी हो सकते हैं। मैं भी चाहूंगा कि पार्टी के अंदर हमें एक-दूसरे से प्रेम से रहना चाहिए। मैंने अपने विरोधियों को भी ऐसे शब्द नहीं कहे।

उन्होंने कहा कि हमारे देश में कोई भी पार्टी हो। उसके अंदर सबकी एक जैसी राय नहीं है।  भाजपा में भी हर विषय पर हर व्यक्ति की एक ही राय नहीं है। मेरा मानना है कि लोकतंत्र में दो लोगों की राय में फर्क हो सकता है। अगर आपकी विचारधारा एक है और आप एक ही मकसद के लिए लड़ रहे हैं, तो अंत में कौन लीड करेगा। यह तो पार्टी को तय करना पड़ेगा।

शशि थरूर ने कहा कि भाजपा में कौन-कौन नेतृत्व कर रहे हैं। कांग्रेस में कौन-कौन नेतृत्व कर रहे हैं। इसका मतलब ये नहीं है कि दूसरे लोग भी अपने आपको कामयाब नहीं मानते हैं। अभी वो लोग अधिकार में नहीं है। किसी भी पार्टी में अंदरूनी लड़ाई मेरे ख्याल में हकीकत है। कुछ न कुछ, कोई न कोई मतभेद सभी जगह होते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी में सभी की सोच अलग हो सकती है। सभी कांग्रेसी नेता भाजपा के खिलाफ हैं।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि मैंने पिछले 21 सालों से किताब नहीं लिखी है, क्योंकि मैं राजनीति और देश से जुड़े महत्वपूर्ण विषय में काम कर रहा हूं। यही कारण है कि मुझे रोमांस के बारे में भी लिखने का मौका नहीं मिल पाया। जब आप सभी मुझे राजनीति से बाहर भेज देंगे, तब रोमांस और दूसरे मुद्दों पर लिखने की कोशिश करूंगा। वैसे भी मुझे रोमांस पर लिखने और नोबेल को लेकर कई चिट्ठियां मिलती हैं। ऐसे में वक्त मिलने पर इस पर जरूर लिखूंगा।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि सवाल पूछना ज्यूडिशियरी को दबाने का संकेत नहीं है। मेरा मानना है कि संविधान ने ज्यूडिशियरी को स्वतंत्र और स्वायत्त स्टेटस दिया है। मुझे लगता है कि सत्ता में बैठे लोगों की ओर से यह सिद्धांत नहीं अपनाया जा रहा है। उनके पास वास्तव में ज्यूडिशियरी पर प्रेशर बनाने की क्षमता है। ऐसे में ज्यूडिशियरी को मजबूत करने की जरूरत है। जहां भी ज्यूडिशियरी के अधिकारों और संविधान की बात आएगी, हमें उसकी रक्षा के लिए बोलना चाहिए।

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