


जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में सुधा मूर्ति ने माय बुक्स एंड बिलिफ सेशन में कहा कि सास के रूप में मुझे गर्व हैं कि मेरा दामाद प्रधानमंत्री है। मैं यह बताना चाहती हूं कि वह अपने देश की सेवा कर रहा है। मेरे पढ़ाए हुए और मेरे बच्चे भारत की सेवा भी कर रहे है। मैंने अपने बच्चों को देश को सर्वोपरी रखने और उसके विकास के साथ उसके नाम को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने की सीख दी है।
सुधा मूर्ति ने कहा- मेरी दादी ने कहा था कि आपके कितने बच्चे हों, यह महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि आप कितने बच्चों की मदद के लिए आगे आए। बच्चे भगवान का अवतार हैं। यही भावना मैं अपने विद्यार्थियोंमें डालती हूं। ताकि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच उनकी मदद करें।
उन्होंने कहा- मेरा मानना है कि छोटी-छोटी चीजों को एंजॉय करना चाहिए। अपने देश के लिए सोचना चाहिए। न उसे बांटने के बारे में सोचना चाहिए। हमारे को बच्चे इंडिया नॉर्थ, साउथ, हिमालय, कश्मीर के रूप में अलग-अलग हिस्सों के रूप में पहचानते हैं, लेकिन हमारे देश की यही खूबसूरती है। इसे ऐसे नहीं बांट सकते। यह हमारे कल्चर का एक रंग है।