Saturday, 29 August 2026

हाईकोर्ट ने इस्तीफा देने वाले विधायकों का मांगा रिकॉर्ड, शपथ पत्र के साथ 30 जनवरी को करें रिकॉर्ड पेश


हाईकोर्ट ने इस्तीफा देने वाले विधायकों का मांगा रिकॉर्ड, शपथ पत्र के साथ 30 जनवरी को करें रिकॉर्ड पेश

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत  समर्थित कांग्रेस विधायकों के इस्तीफों पर हाईकोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष से पूरा रिकॉर्ड मांगा है। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई में 30 जनवरी को शपथ पत्र के साथ विधायकों के इस्तीफे,  विधानसभा अध्यक्ष के फैसले और उन पर  विधानसभा अध्यक्ष की टिप्पणी का पूरा रिकॉर्ड पेश करने को कहा है।  सीजे पंकज मित्थल और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ की पीआईएल पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।

कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि इस्तीफे तय करने के लिए कोई तय अवधि नहीं होना और लंबे समय तक पेंडिंग रखना हॉर्स ट्रेडिंग को बढ़ावा देना है। सीजे पंकज मित्थल ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने इस्तीफों पर निर्णय कर लिया है। यह सही है, लेकिन इसके लिए कोई तय समय सीमा तो होनी चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि इन्हें लंबे समय तक  लंबित रखा जाए।

खंडपीठ ने विधानसभा  अध्यक्ष का आदेश पेश नहीं करने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले विधानसभा सचिव की ओर से पेश किए गए  शपथ पत्र में भी यह जानकारी नहीं थी कि  विधानसभा अध्यक्षके सामने विधायकों ने कब इस्तीफे पेश किए। अभी तक विस्तृत जवाब नहीं दिया है। जो जवाब दिया है, उसमें भी केवल इस्तीफे को अस्वीकार करने की ही जानकारी दी है।

हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता  एमएस सिंघवी से कहा कि 30 जनवरी को विधानसभा सचिव के  शपथ पत्र के जरिए नए सिरे से बताएं कि  विधायकों ने कब इस्तीफे दिए और  विधानसभा अध्यक्ष ने उन पर क्या कार्रवाई की ? इसके अलावा  विधानसभा अध्यक्ष की इस्तीफों पर की गई टिप्पणियां और दस्तावेजों को भी पेश किया जाए। यह भी बताएं कि  विधानसभा अध्यक्ष की ओर से लिए जाने वाले फैसले को वे अनिश्चतकाल के लिए  लंबित रख सकते हैं। मौजूदा  मामले के संबंध में यह अवधि कितनी होनी चाहिए?

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता एमएस सिंघवी ने कहा कि नियमों में यह प्रावधान है कि इस्तीफे को वापस लिया जा सकता है। यदि विधायक ने इस्तीफों को वापस लिया है तो इसी आधार पर  विधानसभा अध्यक्षने उन्हें नामंजूर किया होगा।

सुनवाई के दौरान उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश कर कहा कि पहले 91 एमएलए के इस्तीफा देने की बात कही थी, लेकिन अब 81  विधायकों के ही इस्तीफा दिया जाना बताया जा रहा है। ऐसे में विधानसभा सचिव का  शपथ पत्र ही संदेहास्पद हो जाता है।

शपथ पत्र में पूरी जानकारी नहीं है और यह नहीं बताया गया कि किन-किन  विधायकोंने कब-कब इस्तीफे दिए और उन पर  विधानसभा अध्यक्ष ने कब और क्या-क्या टिप्पणियां कीं। यदि 110 दिन पहले 91 एमएलए के इस्तीफों के संबंध में  विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर कोई जांच की गई तो उसका क्या परिणाम रहा?

इस्तीफों को अस्वीकार करने वाले आदेश को भी  गोट के रिकाॅर्ड पर लाया जाए। वहीं जितने समय तक इस्तीफों को मंजूर नहीं किया गया उस अवधि में  विधायको को वेतन-भत्ते सहित अन्य सुविधाएं लेने का का कोई हक नहीं था और इसलिए उनकी यह राशि रोक देनी चाहिए।



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