Saturday, 29 August 2026

जेडीए ने अवैध रूप से बनी चार मंजिला भवन के अतिक्रमण को हटाने का काम किया शुरू, आसपास के भवन मालिकों में भय व्याप्त


जेडीए ने अवैध रूप से बनी चार मंजिला भवन के अतिक्रमण को हटाने का काम किया शुरू, आसपास के भवन मालिकों में भय व्याप्त

मुख्य गोपालपुरा बायपास, गुर्जर की थड़ी पर सुखविहार योजना के भूखण्ड संख्या 34 पर बनी चार मंजिला बिल्डिंग को शुक्रवार को जेडीए मौके पर सुबह 7 बजे शुरू हुई इस कार्यवाही में डेढ़ घंटे के अंदर ही बिल्डिंग का एक हिस्सा तोड़ दिया। जेडीए की अब इस कार्रवाई से पूरे गोपालपुरा बाइपास पर संचालित दूसरे कोचिंग संस्थाओं के भवन मालिकों में भय व्याप्त हो गया है और उन्हें लगने लगा है कि अब अवैध   से बने भवनों को भी धराशाई किया जाएगा है । यहां पर अधिकांश भवन जेडीए से बिना अनुमति के  बनाए गए है।

जेडीए के सतर्कता विभाग के मुखिया रघुवीर सैनी ने बताया कि मुख्य गोपालपुरा बायपास, गुर्जर की थड़ी पर सुखविहार योजना के भूखण्ड संख्या 34 ये बिल्डिंग बनी है। 296 गज के आवासीय भूखण्ड पर बनी इस बिल्डिंग में व्यवसायिक उपयोग के हिसाब से कंस्ट्रक्शन कर लिया था। जेडीए की बिना अनुमति के और बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन करके बनाई इस बिल्डिंग में बेसमेंट के अलावा 5 मंजिल का निर्माण है, जो कुछ समय पहले कोर्ट स्टे था। कोर्ट स्टे हटने और सील खुलने के बाद शुक्रवार को इसे तोड़ा जा रहा है।

सैनी ने बताया कि हमारी टेक्निकल टीम ने जब बिल्डिंग की जांच की उसमें मिला कि बिना बिल्डिंग प्लान का नक्शा अप्रूड करवाए ये बिल्डिंग बनाई गई। इसमें बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन करते हुए पूर्व दिशा में 15 फीट, पश्चिम दिशा में 10 फीट और उत्तर दिशा में गोपालपुरा बायपास मुख्य सड़क की ओर 20 फीट का सेट बैक कवर करके निर्माण किया गया।

रघुवीर सैनी ने बताया कि जब इस बिल्डिंग का निर्माण चल रहा था तब हमारी टीम के सामने मामला आने पर करीब तीन साल पहले 24 फरवरी 2020 को अवैध निर्माण पर धारा 32-33 का नोटिस जारी किया गया। साथ ही बिल्डिंग मालिक काे कंस्ट्रक्शन बंद करने के लिए कहा गया। नोटिस के बाद भी भूखण्ड स्वामी ने निर्माण जारी रखते हुए नोटिस का जवाब भिजवाया।

भूखण्ड के मालिक का जवाब मिलने और टेक्निकल टीम से जांच करवाने पर जवाब संतोषजनक नहीं मिला। इसके बाद जेडीए ने इस बिल्डिंग को 13 जनवरी 2021 को सील कर दिया था। इस सीलिंग की कार्यवाही के विरोध में भूखण्ड मालिक ने जेडीए की ट्रिब्यूनल कोर्ट में याचिका लगाई, जिसके बाद कोर्ट ने स्टे दे दिया। इस मामले पर चली लम्बी सुनवाई के बाद कोर्ट ने पिछले साल 17 अक्टूबर 2022 को भूखण्ड को सात दिन में सील मुक्त करने के जेडीए के आदेश दे दिए।

कोर्ट के आदेश मिलते ही भूखण्ड मालिक ने जेडीए को बिना इन्फोर्मेशन दिए खुद के स्तर पर जेडीए की ओर से की गई सीलिंग को हटा दिया और वापस निर्माण शुरू कर दिया। इस पर जेडीए ने वापस भूखण्ड मालिक को विधिक नोटिस जारी किया और अवैध निर्माण को रूकवाते हुए गार्ड तैनात कर दिया। जेडीए के इस नोटिस के खिलाफ भूखण्ड मालिक ने जेडीए की ट्रिब्यूनल कोर्ट में फिर याचिका लगाते हुए नोटिस को चैलेंज किया। लेकिन इस बार कोर्ट ने 13 जनवरी 2023 को सुनवाई के बाद भूखण्ड मालिक की अपील को खारिज कर दिया।


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