Saturday, 29 August 2026

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 16 वें संस्करण का आगाज,उत्सव थीम पर 23 जनवरी तक होगा आयोजन


जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 16 वें संस्करण का आगाज,उत्सव थीम पर  23 जनवरी तक होगा आयोजन

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल  में हुए 'ब्रह्मपुराण' सत्र में साहित्यकार बिबेक देबरॉय ने ने कहा कि हमारे पुराण ज्ञान का विश्वकोष है। 18 महापुराणों में विश्व का समूचा ज्ञान भरा पड़ा है। इन पुराणों में 4 हजार श्लोक हैं, जिनमें जीवन, मृत्यु, खानपान, रहन-सहन और सत्यतम व रमोगुण की व्याख्या की गई है। इन पुराणों की रचना महाभारत के बाद कृष्णद्रुपद व्यास में की गई थी। बिबेक ने महाभारत, वाल्मीकि रामायण ओर भागवत महापुराण का अंग्रेजी में अनुवाद किया है। वे इस समय सभी 18 महापुराण पर कार्य कर रहे हैं और अब तक इनमें से 6 पूरी हो गई है।

इससे पहले गुरुवार को शास्त्रीय गायिका सुषमा सोम और पुष्कर के नाथू लाल सोलंकी की प्रस्तुति से होटल क्लार्क्स आमेर में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 16 वें संस्करण का आगाज (शुभारंभ) हुआ। 19 से 23 जनवरी तक यह कार्यक्रम चलेगा। इन पांच दिनों में कला, साहित्य संगीत के साथ वैश्विक मुद्दों को लेकर चिंतन और मंथन किया जा रहा है। इस बार जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन 'उत्सव' थीम पर किया जा रहा है। ऐसे में होटल क्लार्क्स आमेर को राजस्थानी रंगों और कलाकृतियों से सजाया गया है।

उद्घाटन सत्र में नोबेल पुरस्कार विजेता अब्दुल रज्जाक गुरनाह ने कहा कि नेग्लेट करने का हम पर प्रतिरोध है। पूरे तरीके से काम करने के लिए प्रतिरोध नहीं होनी चाहिए। इसी क्रम में पवित्रता और बहादुरी भी आती है। प्रतिरोध करने का एक तरीका लिखना भी है। ऐसे में हमें लिखते रहना चाहिए। डिस्ट्रैक्शन में भी रेजिस्टेंस होना चाहिए। राजमर्रा के जो काम, जिन्हें हम भूलते जाते हैं। यानी हमें यह देखना चाहिए जो महत्वपूर्ण है, वही हमें जीवित रखे हुए है। इसलिए लेखन जारी रहना चाहिए। कई बार ऐसी भी चीजें होती हैं, जिनसे हम विचलित होते हैं और कई बार उनसे आकर्षण होता है, लेकिन यह भी एक तरीके का रेजिस्टेंस है।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के प्रोड्यूसर संजोय रॉय ने बताया कि इस बार ग्रीन कॉन्सेप्ट पर फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। इसमें किसी तरह के कार्ड की जरूरत नहीं होगी। फेस्टिवल में शामिल होने वाले लोग ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद सिर्फ अपना बार कोड दिखाकर फेस्टिवल में शामिल हो सकेंगे। जहां उन्हें साहित्य कला संगीत से जुड़े मुद्दों पर चिंतन और मंथन के साथ ही रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने को मिलेंगे। जहां उनके लिए लजीज व्यंजनों की व्यवस्था भी की गई है।





Previous
Next

Related Posts