


ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 811वें उर्स की बुधवार को अनौपचारिक शुरुआत होगी। झंडा चढ़ाने के लिए भीलवाड़ा का गौरी परिवार सोमवार को दरगाह पहुंच गया। यह परिवार 18 जनवरी को दरगाह के बुलंद दरवाजे पर उर्स का झंडा चढ़ाएगा। उर्स की विधिवत शुरुआत रजब महीने का चांद दिखाई देने पर 22 जनवरी की रात से शुरू होगी। भीलवाड़ा के गौरी परिवार के सदस्य फखरुद्दीन गौरी की अगुवाई में परिवार के कुछ सदस्य अजमेर दरगाह पहुंचे हैं। दरगाह की अकबरी मस्जिद के पास स्थित हॉल में परिवार के सदस्यों को ठहराया है। उर्स को लेकर जिला प्रशासन ने भी तैयारियां पूरी कर ली है।
18 जनवरी को अस्त्र की नमाज के बाद गरीब नवाज गेस्ट हाउस से जुलूस रवाना होगा। सैयद मारूफ चिश्ती और फखरुद्दीन गौरी जुलूस की अगुवाई करेंगे। गौरी परिवार के कुछ सदस्य चादर और तबरुक के थाल सिर पर लेकर चलेंगे। पुलिस बैंड सूफियाना कलाम पेश करेगा। शाही कव्वाल असरार हुसैन की पार्टी के कव्वाल कलाम पेश करते हुए चलेंगे। बड़े पीर साहब की पहाड़ी से तोप के गोले दागे जाएंगे।
वर्ष 1928 में पेशावर के हजरत सैयद अब्दुल सत्तार बादशाह जान ने उर्स के झंडे की परंपरा की शुरुआत की थी। 1944 से 1991 तक लाल मोहम्मद ने यह रस्म निभाई थी। इसके बाद मोइनुद्दीन गौरी ने 2006 तक झंडा चढ़ाया। अब फखरुद्दीन गौरी इस परंपरा को निभा रहे हैं।
ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में दो बड़ी देग है। जहां श्रद्धालु अपनी हैसियत के अनुसार प्रसाद चढ़ाते हैं और नजराना राशि पेश करते हैं। इन दोनों देगों का ठेका इस साल और उर्स के 15 दिन के लिए हुआ। जिसके ठेके की बोली तीन करोड़ 70 लाख में लगाई गई है।