Saturday, 29 August 2026

राहुल से मुलाकात के बाद पायलट ने आम लोगों के बीच जाने का किया फैसला, सीएम गहलोत सरकार की समीक्षा और आगे की रणनीति तैयार करने में जुटे


राहुल से मुलाकात के बाद पायलट ने आम लोगों के बीच जाने का किया फैसला, सीएम गहलोत सरकार की समीक्षा और आगे की रणनीति तैयार करने में जुटे

पंजाब में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद अब सचिन पायलट शक्ति प्रदर्शन के लिए सोमवार से आगामी 5 दिन तक आम लोगों के बीच जाने का फैसला किया है। 16 जनवरी को पायलट नागौर के परबतसर से सभाओं की शुरुआत करने जा रहे हैं। पायलट की सभाओं को किसान सम्मेलन ​नाम दिया है।

नागौर के परबतसर के बाद 17 जनवरी को हनुमानगढ़ के पीलीबंगा में पायलट की सभा है। 18 जनवरी को झुंझुनूं के गुढ़ा, 19 जनवरी को पाली के सादड़ी में किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया है। 20 जनवरी को जयपुर के महाराजा कॉलेज में पायलट की  जनसभा रखी गई है। पांच दिन में पायलट की पांच जिलों में सभाएं राजनीतिक क्षेत्र में चर्चा का बनी हुई हैं।

पायलट किसान सम्मेलनों का समय अहम है। सीएम अशोक गहलोत 16 और 17 जनवरी को जयपुर में सरकार के चार साल के कामकाज और आगे की रणनीति पर चिंतन शिविर कर रहे हैं। इस बीच बजट सत्र से ठीक पहले पायलट की किसान सम्मेलन और  जनसभाओं से कांग्रेस की आंतरिक राजनीतिक तेज हो गई है। पांच जिलों में पायलट समर्थक  सक्रिय हो गए हैं।

राहुल से पायलट की मुलाकात को पहले भावी जिम्मेदारी से जोड़कर देखा गया, लेकिन अब नरेटिव बदल गया है। पायलट की सभाओं से शक्ति प्रदर्शन का मैसेज जा रहा है। सचिन पायलट की सभाओं के ठीक बाद 23 जनवरी से विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने जा रहा है। सचिन पायलट समर्थक विधायकों के सदन में रुख पर सबकी निगाहें रहेगी। ​पहले भी कई बार पायलट समर्थक विधायक गहलोत सरकार को सदन में घेर चुके हैं।

मौजूदा गहलोत सरकार के कार्यकाल का यह आखिरी बजट सत्र है, इस दौरान सदन में उठाए जाने वाले मुद्दे राजनीतिक तौर पर अहम होंगे। पायलट समर्थक विधायक अगर सरकार को घेरने वाले मुद्दे उठाएंगे तो आगे खींचतान और बढ़ सकती है। पायलट समर्थकों के विधानसभा सत्र में अपनाए जाने वाले रुख से बहुत से राजनीतिक मुद्दों पर तस्वीर साफ हो जाएगी। सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट  गुट के बीच नए सिरे से राजनीतिक खींचतान बढ़ जाएगी।

सीएम गहलोत गुट अब भी सचिन पायलट को प्रदेश में जिम्मेदारी दिए जाने का विरोध कर रहा है। पायलट समर्थक नेता उन्हें जिम्मेदारी दिए जाने की मांग उठा रहे हैं। सीएम गहलोत बजट पेश करने की कई बार घोषणा कर चुके हैं, सीएम गहलोत किसी तरह के बदलाव से इशारों में इनकार कर चुके हैं। लेकिन जनवरी वहां अब बदलाव का लगता है यह बदलाव किसके पक्ष में होगा यह तो आने वाला समय ही स्पष्ट कर पाएगा।  सीएम गहलोत गुट को अब निश्चित तौर पर पायलट नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना पड़ेगा। 26 जनवरी के बाद जब भारत जोड़ो यात्रा का समापन हो जाएगा इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सचिन पायलट को अब कोई नई जिम्मेदारी देने की रणनीति तैयार कर रहे है ।  यही कारण है कि सीएम गहलोत आप भी अपने आपको सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं।

 

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