


मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सलाहकार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अरविंद मायाराम के ठिकाने पर गुरुवार को सीबीआई ने छापे मारे हैं। सीबीआई ने अरविंद मायाराम पर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय वित्त सचिव रहते हुए नोट छापने के टेंडर में घोटाले का मामला दर्ज किया था।
अरविंद मायाराम पर उस समय 1688 करोड़ रुपए के करेंसी प्रिटिंग घोटाला का आरोप लगा था। सीबीआई ने घोटाले के मामले में अरविंद मायाराम के ठिकाने से कई डॉक्यूमेंट भी जब्त किए हैं। वर्ष 2017 में इस घोटाले की शिकायत की गई थी।
करेंसी छापने के लिए मटेरियल सप्लाई करने वाली ब्लैकलिस्टेड ब्रिटिश कंपनी से जुड़ा है। कंपनी को मटेरियल की क्वालिटी घटिया होने के चलते वर्ष 2011 में ही ब्लैक लिस्टेड कर दिया था। इसके बावजूद अरविंद मायाराम के फाइनेंस सेक्रेटरी रहते हुए बिना टेंडर प्रोसेस के कंपनी को तीन साल का एक्सटेंशन देकर नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला कलरफुल धागा खरीदने का ऑर्डर जारी हुआ था। यह ऑर्डर करीब 1688 करोड़ का था। यह खरीद वर्ष 2012 में हुई जबकि कंपनी पहले से ब्लैकलिस्टेड थी। बताया जाता है कि इस कंपनी के भारतीय प्रतिनिधि का नाम पनामा पेपर लीक से भी जुड़ा था। इस मामले में अरविंद मायाराम को केन्द्र सरकार ने वर्ष 2017 में नोटिस भेजा था।
16 अक्टूबर 2014 में मोदी सरकार ने जब ब्यूरोक्रेसी में पहला बड़ा बदलाव किया तो उस लिस्ट में अरविंद मायाराम का नाम भी था। उन्हें फाइनेंस से हटाकर टूरिज्म मिनिस्ट्री में भेज दिया गया। मायाराम ने इस पोस्ट पर जॉइन भी नहीं किया था कि महज 15 दिन बाद 30 अक्टूबर को उनका तबादला माइनॉरिटी डिपार्टमेंट में कर कर दिया था।