


फिल्म अभिनेता स्वर्गीय इरफान खान के बेटे बाबिल खान ने जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (जिफ) के बुक लॉन्च कार्यक्रम में हिस्सा लिया। जीटी सेंट्र्ल के फिल्म हॉल में उन्होंने अपनी वेब सीरीज और पिता से जुड़े किस्से शेयर किए।
बाबिल ने कहा कि अब्बा इरफान को पतंग उड़ाना इतना पसंद था कि वो जयपुर आकर मुझे भी भूल जाते थे। पतंग देखते ही उनसे रहा नहीं जाता था। वो सब कुछ भूलकर पतंग उड़ाने चले जाते थे। मैं चाहता था कि वे मेरे पास रहे। इसलिए खुन्नस में उनका मांझा काट देता था। पतंग फाड़ देता था। फटी पतंग को वो सही करते थे। फिर उसे उड़ाते थे। मैं चाहता था वे मेरे साथ वक्त बिताएं, लेकिन पतंग उड़ाने की धुन में वो मुझे भी भूल जाते थे। इससे मैं उदास भी हो जाता था। इस दौरान बाबिल ने साहित्यकार अजय ब्रह्मात्मज की पुस्तक 'और कुछ पन्ने खाली ही रह गए' को रिलीज किया। बाबिल ने कहा कि अब्बा अपनी मां को बहुत प्यार करते थे। वे जयपुर में अपनी मां को झूठ बोलकर एक्टिंग करने गए थे। वे स्टार बन गए थे, तब अपनी मां को बताया करते थे कि देख अब मैं क्या कर रहा हूं ? कहां पहुंच गया हूं ? तब दादी बस यही कहा करती थी कि सब कुछ छोड़कर मेरे पास ही आ जा। पापा घर से यह कहकर निकले थे कि वो टीचर बनने जा रहे हैं। वे रहते मुंबई में थे, लेकिन उनका दिल अपनी अम्मी के पास ही रहता था। बाबिल ने कहा कि अब्बा और अम्मा ने अपनी एनएसडी की पढ़ाई से लेकर बॉलीवुड में काम साथ में ही किया। अब्बा एक्टिंग में व्यस्त थे। मां लिखती रहीं। मां ने हमेशा पापा के बराबर ही काम किया है। काम की चमक हमेशा पिता पर ही रही। मेरे लिए मां का अहसास बहुत खास है। पिता के जाने के बाद वह चमक मेरी मां पर आई है। मैं हर कदम अम्मा से पूछकर ही रखता हूं।