


राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू ने कहा कि आज हमारे सामने जलवायु परिवर्तन के कारण अस्तित्व का खतरा मंडरा रहा है। कोरोना-19 महामारी ने भी जलवायु परिवर्तन के व्यापक प्रभावों को उजागर किया है। पर्यावरण का संरक्षण भी एक तरह से आध्यात्मिक सशक्तीकरण ही है।
आबूरोड में ब्रह्मकुमारी के मुख्यालय पर मंगलवार को आजादी के महोत्सव के दौरान स्वर्णिम भारत की ओर अभियान के तहत आध्यात्मिक सशक्तिकरण से स्वर्णिम भारत का उदय सम्मेलन का उद्घाटन किया और कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में बोलते हुए राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू ने कहा कि मेरा मानना है कि अध्यात्म ही वह प्रकाश-पुंज है जो पूरी मानवता को सही राह दिखा सकता है। अमृत काल में, सन 2047 के स्वर्णिम भारत की ओर आगे बढ़ते हुए हमारे देश को विश्व शांति के लिए विज्ञान और अध्यात्म दोनों का उपयोग करना है।