


टोंक महोत्सव समिति के तत्वाधान में शनिवार को राजपूतों के गढ़ से तीन दिवसीय टोंक महोत्सव की जिला प्रमुख सरोज बंसल,भाजपा जयपुर के संगठन प्रभारी नरेश बंसल,कांग्रेस के हंसराज गाता, सर्व ब्राह्मण समाज टोंक के जिलाध्यक्ष पंडित शेलेन्द्र शर्मा ने बाराही माताजी की विधिवत पूजा अर्चना से शुरुआत की। कार्यक्रम में विभिन्न समाजों के अध्यक्षो को राजस्थानी साफा बंधवाया साथ ही माल्यार्पण करके सम्मान किया।समारोह में जिला प्रमुख सरोज बंसल ने कहा कि टोंक के कण -कण में गंगा -जमुनी संस्कृति बसी हुई है।उन्होंने कहा कि आपसी सदभाव,प्रेम मोहब्बत की मिसाल टोंक की अपनी पहचान है।
जिला प्रमुख सरोज बंसल ने टोंक स्थापना दिवस की नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि टोंक सिर्फ ऐतिहासिक दृष्टि से ही नही बल्कि कलात्मक,पर्यटन ,धार्मिक सदभाव,शिक्षा की दृष्टि से भी अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है।ततपश्चात जिला कलक्ट्रेट टोंक से बैण्डबाजों, अश्वारोही,ऊंटों व कलश यात्रा से शोभायात्रा को जिला कलक्टर चिन्मयी गोपाल,जिला प्रमुख सरोज बंसल ने हरी झंडी दिखा करके रवाना किया।शोभायात्रा घण्टाघर,सुभाष बाजार,पांच बत्ती,काफला,नोशे मियां का पुल, बड़ा कुँआ ,राजटाकीज होते हुए गांधी खेल मैदान पहुंची जहां टोंक स्थापना के1077 साल होने के उपलक्ष्य में केक काटा गया।
शोभायात्रा में जिला कलक्टर चिन्मयी गोपाल,जिला प्रमुख सरोज बंसल, भाजपा जयपुर के संगठन प्रभारी नरेश बंसल,कांग्रेस के हंसराज गाता, सुजीत सिहल,सुरेश बुन्देल,अजीत सिंहल,कविता सिंहल,पार्षद सुनील बंसल,रामचरण साहू सहित काफी संख्या में महिला व पुरुष शामिल थे। उल्लेखनीय रहे टोंक महोत्सव हमेशा राजपूतों के गढ़ तक ही सिमट करके रह जाता था लेकिन इसको तत्कालीन जिला कलक्टर हेमंत गेरा,मुक्तानन्द अग्रवाल,गौरव अग्रवाल ने अपने समय मे भव्य रूप देते हुए हाथी, घोड़ो सहित विभिन्न लोकनृत्यों एवं झांकियों के साथ भव्य रूप दिया ।लेकिन बाद में कोई बड़ा कार्यक्रम आयोजित नही हो सका।इस साल टोंक महोत्सव समिति ने गढ़ से निकल करके टोंक की सड़क तक पहुंच करके शोभायात्रा निकाली है।