


एंडोक्राइन शब्द चिकित्सा पढ़ती का एक गूढ़ शब्द है, जो आज चिकित्सा विज्ञान का प्रमुख हिस्सा है, वो हमारे ऋषि मुनि सैकड़ों वर्ष पहले ही बता चुके है, हमारी चिकित्सा पद्धति दुनिया में सबसे प्राचीन है। यह कहना था राज्यपाल कलराज मिश्र का जो एंडोक्राइन सोसाइटी ऑफ इंडिया (एसिकॉन) के 51 वें वार्षिक कांफ्रेंस के औपचारिक उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे।
कांफ्रेंस के सेक्रेट्री डॉ. संजय सारण ने बताया कि चिकित्सक भगवान का रूप हैं। उन्होंने कहा कि एंडोक्राइन मेडिकल साइंस का ऐसा शब्द है जो सभी बीमारियों को परिभाषित करता है। हार्मोंस से जुड़ी सभी बीमारियों एंडोक्राइन से जुड़ी हैं, एसिकोन एक अच्छी पहल है जिसके जरिए डॉक्टर्स लोगों को एंडोक्राइन से जुड़ी हार्मोंस की बीमारियों के बारे में जागरूक कर रहे हैं। राज्यपाल ने कहा की अत्यधिक भागदौड़ और ज्यादा पाने की लालच में हम तनाव में जी रहे हैं। इसी कारण हमारे हार्मोंस असंतुलित हो गए हैं। इसलिए तनाव रहित रहकर आयुर्वेद विज्ञान के बताए अनुसार नियमित व्यायाम करें और अपनी जिंदगी को अनुशासित बनाएं। हार्मोंस के असंतुलन से ही डायबिटीज और थायराइड बढ़ती घटती है, जो शरीर के सभी अंगों सहित किडनी पर भी असर डालती है। उद्घाटन सत्र में डॉ. प्रकाश केसवानी, डॉ. सैलेश लोढ़ा, डॉ. सुधीर भंडारी, डॉ. प्रेम प्रकाश पाटीदार, डॉ. बलराम शर्मा, डॉ. राजीव कासलीवाल, डॉ एस के शर्मा, डॉ डी सी शर्मा, डॉ. अजय शाह और एंडोक्राइन सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट, डॉ राकेश सहाय उपस्थित रहे। कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन, डॉ. सैलेश लोढा और डॉ. प्रकाश केसवानी ने बताया कि इससे पहले देश के एक्सपर्ट एंडॉकिनलॉजिस्ट ने दिन भर चले विभिन्न सेशन मैं कोरॉना के बाद पड़ने वाले दुष्प्रभाव के कारण एंडोक्राइन से जुड़ी हार्मोन इश्यूज से होने वाली डायबिटीज और थायराइड डिजीज पर अपने विचार साझा किए। डॉ. शशांक जोशी ने कहा कि पूरी दुनिया को एक साथ अपनी चपेट में लेने वाली वैश्विक महामारी कोविड-19 के वैक्सिनेशन के बाद सब कुछ सामान्य होता दिख रहा था, लेकिन अब इसके दुष्प्रभाव भी सामने आने लगे हैं जिसका सीधा असर ह्यूमन ऑर्गन पर पड़ रहा है। इसका मुख्य कारण डायबिटीज और बढ़ता मोटापा है जो कोरोना के बाद तेजी से बढ़ा है। एंडोक्राइन सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट, डॉ. राकेश सहाय ने कहा कि कोरोना के दौरान डायबिटीज के साथ थायराइड ने भी तेजी से पैर पसारे हैं। लॉक डाउन के दौरान वर्क फ्रॉम होम का चलन बढ़ा जिसकी वजह से लंबी सिटिंग और दिनचर्या में बदलाव के चलते लोगो के परिश्रम में कमी आई इसी वजह से डायबिटीज के साथ थायराइड भी तेजी से बढ़ा है। इसी को देखते हुए एसिकॉन 2022 में एंडोक्राइन से जुड़ी बीमारियों पर एक्सपर्ट डॉक्टर्स चर्चा कर रहे हैं इन बीमारियों पर रोकथाम को लेकर डॉक्टर्स अपने विचार साझा कर रहे है और आम लोगों को जागरूक करने के लिए अपने स्तर पर कदम उठाएंगे। गौरतलब है कि राजधानी जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में जारी एंडोक्राइन सोसाइटी ऑफ इंडिया (एसिकॉन) के 51 वें वार्षिक कांफ्रेंस में देश दुनिया के 2000 से अधिक एंडॉक्रिनलॉजिस्ट हिस्सा ले रहे हैं जिसमे अमेरिका जापान म्यांमार बांग्लादेश, यूनाइटेड किंगडम ,कनाडा, नेपाल श्रीलंका के एंडॉक्रिनलॉजिस्ट प्रमुख हैं। इस कांफ्रेंस के साइंसेटिफिक प्रोग्राम का इनॉग्रेशन कल हुआ था। एसिकॉन 2022 में एंडोक्राइन हार्मोंस से जुड़ी तथा डायबिटीज और थायराइड डिजीज की रोकथाम और इसके रिवर्स को लेकर एंडॉक्रिनलॉजिस्ट चर्चा कर रहे हैं। कॉन्फ्रेंस के साइंसेटिफिक प्रोग्राम सेक्रेट्री, डॉ. बलराम शर्मा ने कहा कि एंडोक्राइनोलॉजी के अंतर्गत आने वाली हार्मोंस से जुड़ी बीमारियों में डायबिटीज, मोटापे और थायराइड ने कोरोना के बाद तेजी से पैर पसारे हैं, फास्ट और जंक फूड, अनियमित दिनचर्या, कम परिश्रम करना जैसे कारण अत्यधिक मोटापा को बढ़ाता है, और मोटापे की वजह से ही डायबिटीज होने के संभावना ज्यादा होती हैं। डायबिटीज शरीर के हर ऑर्गन पर प्रभाव डालती है, जिसमे हार्ट अटैक, लंग्स व किडनी से जुड़ी समस्याएं बढ़ाती है। लेकिन भारत ज्यादातर आबादी वैक्सिनेटेड है और अपनी इम्यूनिटी को मजबूत कर चुकी है लेकिन अभी कोरोना का खतरा कम नहीं हुआ है, हमें अभी भी सावधानी बरतने की जरूरत है। और अपनी इम्यूनिटी को बनाए रखने के लिए अपनी दिनचर्या में बदलाव के साथ नियमित एक्सरसाइज, शाकाहारी भोजन और भीड़ से बचना चाहिए।