


प्रदेश के पूर्व विधायकों को दी जा रही पेंशन को अवैध बताते हुए हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर 21 दिसंबर को सुनवाई होनी है। 508 पूर्व विधायकों को हर माह दी जा रही पेंशन से सरकार के खजाने पर सालाना 25 करोड़, 95 लाख, 47 हजार 400 रुपए वित्तीय भार पड़ रहा है।
हाईकोर्ट मेंजनहित याचिका वरिष्ठ पत्रकार मिलापचंद डंडिया ने लगाई है। याचिका में मुख्य रूप से इस बात को आधार बनाया गया है कि संविधान में कहीं भी पूर्व विधायकों को पेंशन देने का कोई प्रोविजन नहीं है। संविधान में पेंशन योजना का प्रावधान सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए हैं जो सरकारी सेवा में रहते हुए सेवानिवृत्त होते हैं। याचिका में सवाल उठाया गया है कि विधायक तय कार्यकाल के लिए जनता द्वारा चुने जाते हैं। उनको सरकारी सेवा में रहने वाले लोक सेवकों की श्रेणी में किस आधार पर रखा जा सकता है ? डंडिया की ओर से हाईकोर्ट में रिट दायर करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ताविमल चौधरी ने बताया कि सरकार ने पूर्व विधायकों को पेंशन का प्रावधान करके संविधान का सीधा उल्लंघन किया है। आज पूर्व विधायकों को पेंशन दी जा रही है, कल को नगर निगम, नगर पालिका, पंचायत समिति के वार्ड मेंबर भी यह मांग कर सकते हैं कि कार्यकाल पूरा करने के बाद उनको भी पेंशन दी जाए। अधिवक्ता विमल चौधरी ने बताया कि संविधान का आर्टिकल-195 विधानसभा को विधायकों की वेतन और भत्ते तय करने का अधिकार देता है। इसके हिसाब से उनको सैलेरी और भत्ते मिल रहे हैं। समय-समय पर विधायकों की वेतन और भत्ते बढ़ाए भी जा रहे हैं। लेकिन संविधान में विधायकों के लिए पेंशन तय करने का अधिकार नहीं दिया है। फिर पूर्व विधायकों को पेंशन क्यों दी जा रही है ? राजस्थान में 1977 से पूर्व विधायकों को पेंशन दी जा रही है। 1 अप्रैल 2019 से पूर्व विधायकों की पेंशन में बढ़ोतरी की गई। पहले 25 हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन दी जा रही थी, बाद में इसे 35 हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया गया। पूर्व विधायकों की पेंशन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले मिलापचंद डंडिया ने बताया कि पूर्व विधायकों को दी जा रही पेंशन गैरकानूनी है। यह सरकारी खजाने पर सीधे रूप से डाका है। सरकार कैसे इस प्रकार का बेतुका फैसला कर सकती है। मैंने याचिका में हाईकोर्ट से गुहार की है कि पूर्व विधायकों की पेंशन तत्काल बंद की जाए और अब तक दी गई पेंशन की रिकवरी करने के सरकार को आदेश दिया जाए।आरटीआई की सूचना के आधार पर विधानसभा ने सूचना दी है कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रा सिंह को सबसे अधिक ₹1,28,700 रुपए की पेंशन मिल रही है। इसके अलावा पूर्व विधायक प्रदुमन सिंह को ₹ 1,28,300 रुपए, नारायण सिंह को ₹1,07,900,सुंदर लाल को ₹107900 और अमराराम को ₹80400 की पेंशन का भुगतान हो रहा है। विधानसभा में 26 विधायकों को 1 बार से अधिक कार्यकाल की पेंशन और 104 विधायकों को प्रतिमाह ₹ 50,000 से अधिक की पेंशन राशि का भुगतान किया जा रहा है।