


राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा मंगलवार को प्रदेश में चलने का आखिरी दिन है। सोमवार को कटिघाटी पार्क से मंगलवार सुबह करीब 6.30 बजे शुरू हुई और अलवर शहर में पहुंचने पर यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। अब यात्रा लोहिया का तिबारा मोदी गढ़ पहुंचकर लंच होगा इसके बाद यात्रा दोपहर में 3:00 बजे से शुरू होगी और शाम 6:00 बजे रामगढ़ पहुंचेगी इसके साथ ही यात्रा का प्रदेश में समापन हो जाएगा। 21 दिसंबर की सुबह पहले फेज के दौरान यात्रा मुंदका गांव से हरियाणा में प्रवेश कर जाएगी।
अलवर राहुल गांधी के नजदीकी राष्ट्रीय महामंत्री भंवर जितेंद्र सिंह का क्षेत्र है। उन्होंने यात्रा के जरिए शक्ति प्रदर्शन के लिए यहां के स्थानीय नेताओं और मंत्रियों को सक्रिय कर एक अच्छा प्रदर्शन कर दिखाया है। इसके अलावा अलवर जिले से उद्योग मंत्री शकुंतला रावत और सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री टीकाराम जुली हैं और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव मेवात बोर्ड के अध्यक्ष जुबेर खान और उनकी पत्नी विधायक साफिया खान का भी क्षेत्र है। राहुल की यात्रा के स्वागत के लिए क्षेत्र में कई दिनों से तैयारियां चल रही थी। यही कारण है कि अलवर शहर में यात्रा का भव्य स्वागत किया गया और लोगों के जुड़ने का सिलसिला अब तेजी से बढ़ गया है इसके कारण यात्रा में लोगों का जो देखने को मिल रहा है। इन सभी मंत्रियों और नेताओं ने यात्रा को सफल बनाने के लिए अच्छी तैयारी की यही कारण है कि यात्रा को अच्छा समर्थन मिल रहा है।
यात्रा में जयपुर शहर युवा कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील सिंघानिया भी शिरकत कर रहे हैं। उन्होंने यात्रा में राहुल गांधी के साथ चलकर उन्हें अपने क्षेत्र के बारे में कुछ जानकारियां दी और उन्होंने युवा कांग्रेस को और अधिक कार्य देने की बात कही।
यात्रा में प्रदेश कांग्रेस के सचिव पुष्पेंद्र भारद्वाज ने भी राहुल गांधी के साथ चलकर कांग्रेस के हालात के बारे में जानकारियां दी और उन्हें सांगानेर विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों के बारे में बताते हुए कहा कि सरकार ने अच्छा काम किया है।
मंगलवार को भारत जोड़ो यात्रा में शुरुआत से ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अलावा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भी यात्रा में शामिल हुए हैं और अब राहुल गांधी के साथ चल रहे हैं। शिक्षा मंत्री डॉ.बीडी कल्ला को यात्रा की व्यवस्थाओं के लिए प्रभारी बनाया हुआ है वह पिछले 2 दिन से अलवर क्षेत्र में रहकर ही यात्रा को सफल बनाने के लिए भरपूर कोशिश में जुटे हुए हैं। यही कारण है कि अलवर में यात्रा को दोसा जैसा समर्थन मिल रहा है।