


बनास नदी में अवैध रूप से बजरी खनन किए जाने के खिलाफ अब ग्रामीण महिलाएं भी लामबन्द होने लगे है।जिनका आरोप है कि बजरी लीज धारक की प्रशासन एवं पुलिस मिलीभगत होने के कारण धड़ल्ले से अवैध बजरी का नियमो के खिलाफ उठाव किया जा रहा है।
बनास नदी के समीप बसे गांव बोरदा एव नयागांव के लोगो का कहना है कि बजरी लीज होल्डर्स द्धारा अवैध बजरी खनन किए जाने पर लीज निरस्त किए जाने का प्रावधान है।लेकिन न तो खनिज विभाग न ही पुलिस व जिला प्रशासन द्धारा लीज धारक के खिलाफ कोई कार्यवाई की जा रही जिससे वह अवैध बजरी खनन में लिप्त है।
पिछले दो दिनों से बनास नदी में अवैध बजरी लीज होल्डर्स के खिलाफ बोरदा एवं नयागांव सहित आसपास के गांवो के लोग बनास नदी में डटे हुए है। जिनका कहना है कि किसी भी कीमत पर अवैध बजरी नही उठाने देंगे।ऐसे हालातों में बनास नदी नयागांव व बोरदा के ग्रामीणों में आक्रोश है।
पिछले दो महीने से बनास नदी में लीज होने के बावजूद आज तक कोई सीमांकन नही किया गया।जब कि अब ग्रामीणों ने विरोध किया तो खानापूर्ति के लिए खनिज विभाग के अधिकारी संजय शर्मा सहित अन्य अधिकारी सीमांकन के लिए पहुंच रहे है।ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए मेहंदवास पुलिस थानाधिकारी देवेंद्र सिंह पुलिस बल सहित शनिवार को नया गांव बनास नदी में डेरा डाले हुए थे वही दूसरी तरफ ग्रामीणों की भीड़ जमा थी जिसमें महिलाएं भी शामिल थी ।
पंचायत समिति टोंक के उपप्रधान रामकेश मीणा ने बताया कि बनास नदी में जलदाय विभाग के पेयजल स्त्रोत कुएं है वही ग्रामीणों द्धारा खेतों में कुंए खोद रखे है बजरी के दोहन से इनका जलस्तर निरन्तर नीचे जाने से सिचाई एव पेयजल संकट खड़ा हो सकता है।