


केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि प्रदेश की गहलोत सरकार के खिलाफ जन आक्रोश यात्रा में भाजपा को 14 लाख शिकायतें मिल चुकी हैं। इनमें 11 लाख से ज्यादा हाथ से लिखी हुई हैं। 3 लाख ऑनलाइन वेबसाइट पर मिली हैं। पार्टी ने फैसला किया है कि 15 से 31 दिसंबर तक विधानसभा लेवल पर बड़ी जनाक्रोश सभाएं होंगी। जिसमें राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेता रात में दौरे (प्रवास) करेंगे। हर विधानसभा क्षेत्र में 8 से 10 कार्यकर्ता जाएंगे। प्रदेश में 2000 कार्यकर्ता दौरे करेंगे। जनता के बीच प्रदेश की कांग्रेस सरकार की नाकामियां और केंद्र की मोदी सरकार की उपलब्धियां बताएंगे।
प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया के नेतृत्व में हम राजस्थान में जन आक्रोश यात्रा निकाल रहे हैं। अब तक राजस्थान में 200 रथों ने 94 हजार किलोमीटर की यात्रा निकाली गई है। 50 हजार 367 छोटी बड़ी नुक्कड़ सभाएं आयोजित हुई हैं। 82 लाख 75 हजार से ज्यादा लोगों से रथ यात्रा के जरिए हम जुड़े हैं। जनाक्रोश यात्रा में दो तरीके से जनता से शिकायतें ली गईं। शिकायत पेटी और वेबसाइट के जरिए शिकायतें आईं। 11 लाख 87 हजार हाथ से लिए हुए आरोप पत्र प्राप्त किए हैं।वेबसाइट पर 3 लाख शिकायतें दर्ज हुई हैं। 75 लाख आरोप पत्र बांटे गए हैं। 31 लाख स्टीकर लगाए गए हैं। अभियान में युवाओं, महिलाओं, एससी-एसटी ही हजारों चौपालें की गई हैं।
जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि15 दिसंबर से 31 दिसंबर तक विधानसभा लेवल पर जन आक्रोश सभाएं होंगी। जिनमें बूथ महासम्पर्क अभियान भी चलाया जाएगा। घर-घर जनाक्रोश के संदेश को ले जाकर जन भावनाओं को एकत्रित करेंगे। 25 दिसंबर को जब देश पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में सुशासन दिवस मना रहा होगा, तब भाजपा के कार्यकर्ता प्रदेश के सभी बूथों पर मन की बात कार्यक्रम भी सुनेंगे। प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में बड़ी जनसभाएं होंगी। जिनमें प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के नेता जाकर संबोधित करेंगे। हर विधानसभा क्षेत्र में 8 से 10 कार्यकर्ता और पूरे प्रदेश में करीब 2000 कार्यकर्ता रात को क्षेत्र में ही रात्रि विश्राम करेंगे।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री शेखावत ने कहा कि वर्ष 2014 से लेकर अब तक केंद्र की मोदी सरकार की लोक कल्याण की योजनाओं को यात्रा के जरिए जनता तक पहुंचाया जाएगा। प्रदेश में जब भाजपा की सरकार थी, तो केंद्र की योजनाओं का सही इम्प्लीमेंटेशन हो रहा था। लेकिन 2018 में राजस्थान में सरकार बदलने के बाद केंद्र सरकार की आम लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने की योजनाओं को सही ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है। राजस्थान 61 योजनाओं में नीचे से तीसरे पायदान पर पहुंच गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना में प्रदेश पिछड़ा है। 3 जिलों- दौसा, झुंझुनूं, राजसमंद में शून्य काम पिछले सालों में हुआ है। सीकर, जयपुर, धौलपुर, डूंगरपुर, पाली, बूंदी, चूरू, बारां में आवास का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री शेखावत ने कहा कि केंद्र से राजस्थान सरकार की मांग के मुताबिक खाद उपलब्ध करवाने के बावजूद प्रदेश सरकार के संरक्षण और सरकार के नुमाइंदों के संरक्षण में खाद की कालाबाजारी हुई। उससे जनता में भारी जन आक्रोश है। एनएफएसए और पीएम की ओर से दी गई सहायता के मुताबिक गरीब व्यक्ति का चूल्हा जलता रहे, इस टारगेट के साथ खाद्यान्न उपलब्ध करवाया गया। लगातार ढाई साल तक खाद्यान्न उपलब्ध करवाया गया। राजस्थान सरकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण गरीबों को अन्न नहीं मिल पाया। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री शेखावत ने कहा कि हर घर पीने का पानी पहुंचाने की योजना 15 अगस्त 2019 में पीएम नरेंद्र मोदी ने घोषित की थी। तब देश में 16 फीसदी कवरेज था। वह बढ़कर आज 56 परसेंट को छूने वाला है। उन्होंने कहा कि योजना के लिए प्रदेश को सबसे ज्यादा 27-28 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का बजट केंद्र से दिए जाने के बावजूद राजस्थान सरकार आज तक 5000 करोड़ का ही बजट खर्च कर पाई है। कुल योजना में 50-50 फीसदी पैसा केंद्र और राज्य सरकार निवेश करती है। राजस्थान सरकार को भी 27 हजार करोड़ रुपए देना था। लेकिन राजस्थान सरकार अपना निवेश नहीं कर रही है। पीने का पानी देने के लिए इसके पास पैसा नहीं है। लेकिन भ्रष्टाचार करने और उसके जरिए पैसा कमाने के लिए रेवड़ियां बांटी जा रही हैं। स्मार्टफोन बांटने से लेकर पता नहीं कौन-कौनसी स्कीम में गहलोत सरकार पैसा लगा रही है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री शेखावत ने कहा कि प्रदेश के 1000 पंचायतों में से एक भी पंचायत के 100 फीसदी घरों में राजस्थान सरकार पानी पहुंचने की बात दावे के साथ नहीं कह सकती है। कुल 43 हजार 364 गांव में से केवल 21 हजार 48 गांव ऐसे हैं, जिनमें काम भी शुरू नहीं हो पाया है। 50 फीसदी गांवों में तो काम भी शुरू नहीं हो पाया है। कागजों में ही काम हो गया। भुगतान हो गया। लेकिन वह काम धरातल पर नहीं उतर पाया। हमने प्रदेश सरकार को थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन कराने के लिए कहा था, लेकिन दुर्भाग्य है थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन ठीक से नहीं होने के कारण राजस्थान में काम की क्वालिटी बहुत खराब है।