


गुजरात चुनाव में कांग्रेस की करारी हार को लेकर हाईकमान गंभीर और चिंतित है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे के साथ ही कुछ वरिष्ठ नेता मौजूदा परिस्थितियों को लेकर समीक्षा कर रहे हैं। ऐसा संदेश मिल रहा है कि आने वाले समय में कांग्रेस की रीति-नीति में व्यापक बदलाव किया जाएगा। कहने को तो गुजरात के प्रभारी डॉ रघु शर्मा ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन अभी यह देखा जाएगा कि पार्टी किन कारणों के कारण गुजरात में हारी है और उसमें किस-किस की लापरवाही रही है उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है !
गुजरात चुनाव में हुई करारी हार का सीधा प्रभाव राजस्थान की राजनीति पर भी पड़ने वाला है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सीनियर ऑब्जर्वर बनाकर संपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन इस बीच सीएम गहलोत ने जिस प्रकार का व्यवहार सचिन पायलट के साथ किया उसका सीधा तौर पर प्रभाव गुजरात के चुनाव में पार्टी को भुगतना पड़ा। अब गुजरात में कांग्रेस को विपक्ष का दर्जा भी नहीं मिल पा रहा है 77 सीटों वाली कॉन्ग्रेस अब वहां पर मात्र 15 सीटों पर सीमित हो गई है।
सीएम गहलोत अब कमजोर हुए हैं और गुजरात की करारी हार का जवाब देने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने जिस प्रकार की कार्ययोजना तैयार की गई थी वह पूरी तरह से फेल हुई है। यह बात भी सही है कांग्रेस नेतृत्व सीधे तौर पर सीएम गहलोत से पूछेगी कि आखिर पार्टी चुनाव में क्यों हारी और इसमें किसकी भूमिका रही। यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व हार की जानकारियों के लिए समिति भी गठित कर सकता है और उसी आधार पर आने वाले समय में निर्णय भी किए जा सकते हैं!
एक बार फिर से यह चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर कांग्रेस नेतृत्व के समय रहते हुए निर्णय नहीं लेने के कारण आज गुजरात में जो पार्टी को करारी हार मिली है वह किसी और से नहीं खुद केंद्रीय नेतृत्व की कमजोरी के कारण हुई है। वर्तमान में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान में है और राजस्थान का ढाई साल से पार्टी का संगठन नहीं है और आने वाले समय में आपकी गुटबाजी के कारण यह शीघ्र बनने वाला नहीं है।
अब यहां केंद्रीय नेतृत्व को राजस्थान के बारे में कुछ कठोर निर्णय लेने पड़ेंगे नहीं तो आने वाले समय में गुजरात जैसे हाल बन सकते हैं ! ऐसे में सरकार बने रहने की चिंता अब कांग्रेस नेतृत्व को छोड़ देनी चाहिए अगर सरकार बचाने के चक्कर में कोई निर्णय नहीं किया गया तो कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। आज जरूरत इस बात की है कि आने वाले समय में कांग्रेस संगठन की स्थिति कैसे मजबूत हो और यहां पर फिर से कांग्रेस का शासन आए। इस पर खुले तौर पर समीक्षा और निर्णय किए जाने की जरूरत है। यह बात भी सही है कि सीएम गहलोत अभी अपनी स्थिति को बनाए रखने के लिए कुछ धमकियां देकर डराने का प्रयास भी कर सकते हैं लेकिन पार्टी नेतृत्व को इससे निपटने के लिए कुछ कठोर निर्णय तत्काल करने चाहिए जिससे कि संगठन के नेताओं को यह संदेश जाए कि आने वाले समय में आप पार्टी संगठन किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा। राजस्थान में प्रदेश अध्यक्ष अभी तक स्थाई तौर पर घोषित नहीं हो पाया है संगठन की ओर से केंद्रीय चक्की के पास एक लाइन का प्रस्ताव मौजूद है उस पर निर्णय तत्काल किया जाए। सीएम गहलोत के बारे में क्या कुछ करना है इसकी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
राजस्थान में 8 महीने बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं इसके बाद लोकसभा के चुनाव होंगे ऐसे में संगठन को पहली प्राथमिकता के आधार पर बनाए जाने की जरूरत है। मौजूदा स्थिति में 400 ब्लॉक अध्यक्ष और 30 जिला अध्यक्ष नहीं बने हैं। अब केंद्रीय नेतृत्व को सीधे तौर पर सीएम गहलोत और सचिन पायलट के बीच में जो खाई बनी हुई है उसे कैसे पाटा जाए इस पर गंभीर तौर पर चिंतन और मनन किए जाने की जरूरत है। लगभग 10 दिन बाद राहुल गांधी की यात्रा राजस्थान से विदा हो जाएगी उसके बाद यहां की परिस्थितियां कैसे बदलाव लेगी इस पर चिंतन और मनन करने की पहली जरूरत है नहीं तो हाल और खराब होने वाले हैं। यह बात भी सही है कि हिमाचल में पार्टी की जीत में प्रियंका गांधी और सचिन पायलट की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। यह बात भी सही है कि जो जीत के लिए काम करता है उसे निश्चित तौर पर कोई नई जिम्मेदारी दी जानी चाहिए नहीं तो उस नेता में निराशा का भाव आता है।
अब चर्चाएं जोरों पर है कि निश्चित तौर पर सीएम गहलोत को गुजरात की करारी हार की जिम्मेदारी लेकर अपने स्तर पर कोई निर्णय कर पार्टी के नेताओं को यह बताने का प्रयास करना चाहिए कि उन्होंने पार्टी के लिए त्याग किया है। अब आने वाले समय में जो पार्टी उन्हें जिम्मेदारी देगी उसे निभाएंगे। लेकिन यह निर्णय आसान नहीं है और ना ही ऐसा सोचा जाना चाहिए कि गहलोत इस प्रवृत्ति के होंगे कि वह अपना अहम पद छोड़ दें और यह कहे कि पार्टी हाईकमान जो निर्णय करेगा उसका वह खुले तौर पर समर्थन करेंगे। जैसा कि गुजरात चुनाव के दौरान सीएम गहलोत की बयानबाजी से पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है और यह भी कहना पड़ेगा कि राहुल ने उन्हें क्या कुछ कहा कि उन्होंने खुले तौर पर टीवी को अपनी भावनाएं प्रकट कर चौंकाने वाला काम किया। अब पार्टी नेतृत्व को निश्चित तौर पर खुले तौर पर कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर यह जताना चाहिए कि पार्टी किसी नेता को विशेष को महत्व नहीं देती बल्कि पार्टी के संगठन को मजबूत करने के लिए अगर कोई निर्णय करना पड़े तो उसे किया जाने की जरूरत है। अगर केंद्रीय नेतृत्व शीघ्र निर्णय करेगा तो पार्टी के साथ न्याय होगा। इस निर्णय से कार्यकर्ताओं में नई उमंग और उत्साह पैदा होगा जो कि भविष्य के लिए एक नया संदेश देने का काम करेगा।
इंतजार सभी को है कि राजस्थान के बारे में पार्टी का नेतृत्व क्या कुछ निर्णय करेगा अब यह भी चर्चा जोरों पर है कि फैसला तत्काल किया जाना चाहिए। जिससे कि उसका असर भी राजस्थान के साथ-साथ अन्य प्रदेशों में भी सीधे तौर पर जा सके। फिलहाल सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी राजस्थान में है और यहां के भविष्य का फैसला भी उनके रहते हुए हो तो निश्चित तौर पर एक नया संदेश जाएगा। फैसले का असर कार्यकर्ता और नेताओं पर सीधे तौर पर पड़ेगा। यही नहीं आने वाले समय में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में पार्टी को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।