


कांग्रेस हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री के नाम का फैसला नहीं हो पाया है। शुक्रवार को 40 विधायकों और केंद्रीय पर्यवेक्षकों के बीच करीब एक घंटे चली बैठक में अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान पर छोड़ दिया गया।
बैठक में 6 चेहरों पर चर्चा हुई, जिनमें प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह, सुखविंदर सुक्खू, मुकेश अग्निहोत्री, चंद्र कुमार, हर्षवर्धन चौहान और धनीराम शांडिल के नाम शामिल हैं। मगर किसी एक पर सहमति नहीं बन पाई। हालांकि सबसे बड़ा पेंच प्रतिभा सिंह और सुखविंदर सुक्खू के के बीच पेंच फंसा हुआ है।
कांग्रेस के हिमाचल प्रभारी राजीव शुक्लाने कहा कि विधायकों ने अंतिम फैसले के लिए पार्टी हाईकमान को सारे अधिकार दे दिए हैं। विधायक मुकेश अग्निहोत्री ने इसका प्रस्ताव रखा, जिस पर सभी 40 विधायकों ने सहमति जताई। पर्यवेक्षक शनिवार को हाईकमान को रिपोर्ट पेश करेंगे। इसके बाद सीएम का नाम तय किया जाएगा । उन्होंने कहा कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है।
कांग्रेस विधायकों की बैठकदोपहर 3 बजे होनी थी, लेकिन सारे विधायक नहीं जुटे। कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला, केंद्रीय पर्यवेक्षक भूपेश बघेल और भूपेंद्र हुड्डा ने फिर शाम 6 बजे का समय तय किया। इसके बावजूद यह बैठक साढ़े सात बजे के आसपास शुरू हो पाई।
हिमाचल कांग्रेस में गुटबाजी अब खुलकर सामने आ गई है। पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में प्रतिभा सिंह समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की। शाम की बैठक में जब भूपेश बघेल पार्टी कार्यालय पहुंचे तो कुछ समर्थक उनकी गाड़ी पर भी चढ़ गए। प्रतिभा समर्थकों ने कांग्रेस कार्यालय को भी घेर लिया।
मुख्यमंत्री पद के दूसरे बड़े दावेदार सुखविंदर सुक्खू भी लंबे इंतजार के बाद पार्टी कार्यालय पहुंचे। उनके आते ही समर्थकों ने उन्हें कंधे पर उठा लिया और कार्यालय के अंदर ले गए। इस दौरान सुक्खू और प्रतिभा सिंह समर्थकों के बीच धक्कामुक्की भी हुई। पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा। समर्थकों को संभालने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को बुलाना पड़ा।
इससे पहले दोपहर तीन बजे होने वाली बैठक सुक्खू समर्थक विधायकों के न आने से शाम 6 बजे तय की गई। हालांकि यह भी डेढ़ घंटे देरी से शुरू हुई। सुक्खू अपने 18 समर्थक विधायकों के साथ अनट्रेसेबल थे।
मुख्यमंत्री पद के लिए प्रदेश के 6 नेता दावा कर रहे हैं। इस बीच नाटकीय मोड़ तब आया जब हिमाचल प्रभारी राजीव शुक्ला, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल और हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार बनाने का दावा पेश करने राजभवन पहुंच गए। इस दौरान उनके साथ प्रदेश का एक भी नेता मौजूद नहीं था।
राजभवन में प्रदेश के नेताओं की गैरमौजूदगी पर प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने फिलहाल औपचारिक तौर पर राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया है। जब उनसे पूछा गया कि कांग्रेस हाईकमान की ओर से भेजे गए कांग्रेस के तीन बड़े नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात क्यों की ? इन्होंने राज्यपाल को कौनसा पत्र सौंपी?
इस पर प्रतिभा सिंह ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेताओं ने राज्यपाल को क्या लेटर दिया। उनकी जानकारी के मुताबिक अभी बघेल, हुड्डा और शुक्ला विधायकों के साथ बैठक कर उनकी राय लेंगे और उसके बाद पार्टी हाईकमान को जानकारी देंगे। हाईकमान के निर्देश के बाद ही पार्टी सरकार बनाने का दावा पेश करेगी।
इससे पहले बघेल सहित तीनों केंद्रीय नेताओं ने दोपहर करीब 1 बजे हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मंडी की सांसद प्रतिभा सिंह से होटल में ही बैठक की। इसके बाद प्रतिभा सिंह सीधे अपने निजी आवास होली-लॉज चली गईं। दूसरी ओर कांग्रेस के सभी विधायक शिमला के अलग-अलग होटलों में जुटे हैं। वे अलग-अलग गुटों में मीटिंग कर रहे हैं। विधायक दल की बैठक में हो रही देरी से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में जमा प्रतिभा सिंह के समर्थक नाराज हो गए। उन्होंने कांग्रेस ऑफिस में ही नारेबाजी शुरू कर दी। इनकी मांग है कि प्रतिभा सिंह को तुरंत विधायक दल का नेता घोषित किया जाए।