Saturday, 29 August 2026

सीएम गहलोत और पायलट के बीच सीधे तौर पर तालमेल नहीं, पहले राहुल और अब केसी वेणुगोपाल मध्यस्था के तौर पर है कायम !


सीएम गहलोत और पायलट के बीच सीधे तौर पर तालमेल नहीं, पहले राहुल और अब केसी वेणुगोपाल मध्यस्था के तौर पर है कायम !

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच देखने दिखाने को तो मामला सुलझ गया है। लेकिन यह सच है कि पहले सीएम गहलोत और सचिन पायलट के बीच मध्यस्था की घड़ी स्वयं राहुल गांधी थे । अब दोनों की  मध्यस्था के लिए संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल को रखा है। यह बात भी सही है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दोनों नेताओं में एकता दिखेगी और यात्रा को सफल बनाने के लिए दोनों के समर्थक नेता और कार्यकर्ता जोश के साथ काम पर लगेंगे। 

सीएम गहलोत और पायलट ने सार्वजनिक तौर पर यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी के नेता राहुल गांधी के बयान के बाद दोनों के बीच चल रहा विवाद का कोई मायने नहीं रह जाता। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान में 1 दिन देरी से आने की संभावना है। इसका मूल कारण यह है कि यात्रा सेंचुरी इलाके में पैदल की जगह बसों के माध्यम से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है। यही कारण है कि राहुल गांधी की यात्रा को प्रदेश में प्रवेश कराने को लेकर समय सीमा अभी तय नहीं हो पा रही है।

यह बात भी सही है कि राहुल गांधी की यात्रा के रात्रि विश्राम में प्रदेश में कुछ जगहों पर निजी किसानों की खड़ी फसल को नष्ट किए बिना यात्रा विश्राम संभव नहीं हो पा रहा है । ऐसे में कांग्रेस के नेता और जिला प्रशासन के अधिकारी इस कोशिश में जुटे हैं कि किसान को मना लिया जाए। वही पीड़ित किसान यही कहते नजर आ रहे हैं कि उन्हें मुआवजा दिया जाए तो वे अपनी फसल को भी नष्ट करने को भी तैयार है। अब चाहे कुछ भी हो लेकिन राहुल की यात्रा को सफल बनाने के लिए प्रशासनिक अमला भी पहले से अधिक सक्रिय नजर आ रहा है। यात्रा के मार्ग को लेकर पुलिस महानिदेशक ने भी अपने स्तर पर समीक्षा बैठक कर ली है।

सीएम गहलोत की कोशिश है कि गुर्जर संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय बैंसला और सरकार के बीच समझौते की अगुवाई खेल राज्यमंत्री अशोक चांदना से ही कराएं। जिससे कि प्रदेश के गुर्जर नेताओं में यह संदेश जाए कि सरकार में गुर्जर प्रतिनिधि के रूप में अशोक चांदना को मान्यता मिली हुई है। बुधवार को कुछ बातों को लेकर सहमति बनी है उसके आदेश जारी किए जा सकते या कोई लिखित में हो सकता है !बुधवार की बैठक के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा ?

राहुल गांधी की यात्रा को सफल बनाने के लिए राज्य समन्वय समिति बैठक में केसी वेणुगोपाल ने जब वहां मौजूद लोगों को स्पष्ट तौर पर कहा कि  सभी अपनी बयानबाजी पर पूरी तरह से लगाम लगा के रखें नहीं तो उन्हें 12 घंटे के अंदर ही पार्टी के बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। इसी बीच पंजाब के प्रभारी और राष्ट्रीय समन्वय समिति के सदस्य हरीश चौधरी ने कहा कि वे अपनी मन की बात कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की यात्रा के बाद वह अपनी बात को रखेंगे इस पर केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट तौर पर कहा कि ऐसा करना गलत होगा। 

उन्होंने कहा कि जब पार्टी के उच्च स्तर पर बातें हो गई है तो अब  यहां इस प्रकार की बातें करना गलत है। उन्होंने कहा कि इसका संदेश गलत जाता है। उन्होंने हरीश चौधरी को भी कड़े शब्दों में कहा कि अब पार्टी में अनुशासन चलेगा और अनुशासन नहीं रखने वाले नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। इस बातचीत के बाद समन्वय समिति का माहौल बदल गया और सभी नेता यही सोचने लगे कि उन्होंने जो बयानबाजी की है अगर कार्यवाही हुई तो क्या होगा ? केसी वेणुगोपाल ने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा से कहा कि वेअपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें इस पर पार्टी विचार कर निर्णय करेगी। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सीएम गहलोत की बातों की रिपोर्ट डोटासरा हाईकमान तक पहुंचाने की हिम्मत जुटा पाएंगे या नहीं। 

यह बात भी सही है कि राहुल गांधी ने सीएम गहलोत और सचिन पायलट को पार्टी पार्टी की ऐसैट्स बताया है और कहा है कि भारत जोड़ो यात्रा और उसके बाद चुनाव तक दोनों में तालमेल बनाकर पार्टी को वापस से सत्ता में लाने का काम किया जाएगा। अब यहां सवाल यह उठता है कि आखिर गोविंद सिंह डोटासरा की क्या स्थिति रहेगी यह स्पष्ट नहीं हो पा रही है। इसके अलावा जिन्होंने पार्टी में बगावत की उन तीनों नेताओं के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी इस पर भी सवाल खड़े हुए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का यही सवाल सामने आता है कि आखिर बड़े नेताओं द्वारा अनुशासनहीनता की कार्रवाई की जाती है तो उनके खिलाफ पार्टी कार्यवाही नहीं करती है।

पार्टी को मजबूत बनाने की बात तो की जा रही है लेकिन आखिर पार्टी का संगठन कब तक घोषित हो पाएगा। ढाई साल से 400 ब्लॉक अध्यक्ष और 30 जिला अध्यक्ष नहीं बन पाए हैं। पार्टी का ढांचा पूरी तरह चरमरा हुआ है इसको सुधारने के लिए कौन जिम्मेदार है ! पार्टी को सत्ता में लाने की बात नेता करते तो है लेकिन संगठन को बनाने के लिए कोई कड़े कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। जिलों में कार्यक्रम किस प्रकार से आयोजित किए जा रहे हैं यह सबके सामने है।  

सीएम गहलोत अपने निगम बोर्ड के अध्यक्ष हो या मंत्रियों के माध्यम से जिलों में अपना आधिपत्य कायम रखने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन संगठन के नेता निराश और मायूस है उनकी सुध कौन लेगा कोई बताने के लिए तैयार नहीं है ! 

एकता की बात कहना अलग बात है और धरातल पर पार्टी को मजबूत और सुधार बनाने की कार्यप्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करना चुनौती का काम है। ढाई साल पहले संगठन को पूरी तरह से  छिन्न भिन्न करने का काम जो किया गया वह आज तक नहीं सुधर पाया है। 

केसी वेणुगोपाल राज्य समन्वय समिति के लोगों से बातचीत करके तो चले गए लेकिन कार्यकर्ताओं की किसी ने नहीं सुनी उन्हें कौन दिलासा देगा कि अब उनके साथ भी न्याय होगा ! सवाल निश्चित तौर पर यह पूछा जाएगा कि बड़े नेताओं में  दिखावे के लिए समन्वय करा दिया गया है। लेकिन उनके समर्थकों के बीच तालमेल कौन कराएगा यह आज भी सवाल खड़ा हुआ है ! राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को सफल और भव्य बन जाएगी। लेकिन  कांग्रेस पार्टी की स्थिति पहले जैसी कब बनेगी और कैसे बनेगी इसका रोडमैप पर विचार किए जाने की जरूरत है। 

कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए सबसे पहले इस रणनीति पर काम होना चाहिए कि आने वाले समय में ब्लॉक और जिला अध्यक्षों की घोषणा की जाए। पार्टी को स्थाई प्रदेश अध्यक्ष दिया जाए और उसकी कार्यकारिणी घोषित हो। इसके अलावा राजनीतिक नियुक्तियों और मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल करने के बाद ही पार्टी में नया संदेश जाएगा और पार्टी के दिन सुखद आएंगे। नहीं तो दिखावा करने से कुछ होने वाला नहीं है। 

पार्टी हाईकमान को राजस्थान का शीघ्र प्रभारी नियुक्त करना चाहिए  नहीं तोतो यहां आम कार्यकर्ता अपनी मन की बात किसको बताएगा और कौन सुनेगा ! गुटबाजी कैसे दूर होगी इस पर भी मंथन और निर्णय करने की जरूरत है। राहुल गांधी अब यह कह चुके हैं कि उनका पुराना ख्याल बदल गया है वे भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से देश की आवाज बनकर सामने आ रहे हैं और भविष्य में उनकी यात्रा का संदेश कितना कुछ कारगर हो पाएगा वह तो आने वाला समय ही बता पाएगा। अब हम बातें बहुत कुछ कर सकते हैं लेकिन पार्टी के नेताओं को एक ही सीख देना चाहते हैं कि वह अपने कामकाज को सुधारें और स्वार्थ छोड़कर पार्टी के हित में काम करें तो निश्चित तौर पर समय सुखद और अच्छा आ सकता है नहीं तो यह सब ख्याल केवल सपना मात्र रह जाएंगे !



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