


अजमेर जिला परिषद के सीईओ हेमंत स्वरूप माथुर के खिलाफ जिले के सरपंच और अन्य ग्रामीण जनप्रतिनिधियों अपनी मांगों को लेकर मंगलवार को जिला कलक्टर अंशदीप को ज्ञापन देने के साथ ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया है। जिसमें सरकार की मंशा के अनुरूप काम नहीं करने का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की ।
मंगलवार को अजमेर सरपंच संघ के साथ ही पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों ने जवाहर रंगमंच में जिला कलेक्टर अंशदीप से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से सरपंचों और जनप्रतिनिधियों ने बताया कि जब से अजमेर जिला परिषद में हेमंत स्वरूप माथुर ने सीईओ का पद संभाला है, तब से ही ग्रामीण क्षेत्र में विकास कार्य अवरुद्ध है। सरकारी योजनाओं का लाभ भी ग्राम वासियों को नहीं मिल पा रहा। साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ भी ग्राम वासियों को नहीं मिल रहा है। अगर कोई सरपंच व अन्य जनप्रतिनिधि इस मामले में बातचीत का सवाल उठाते हैं, तो उनके खिलाफ जांच बैठाकर उनको डराया धमकाया जा रहा है। इन सभी समस्याओं को लेकर मंगलवार को सरपंच प्रतिनिधियों के साथ ही जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्य ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द इस मामले में अगर उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो वह आंदोलन का रुख अपनाएंगे। इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। पूर्व जिला परिषद सदस्य और कांग्रेस नेता शक्ति सिंह राठौड़ ने इस मामले में मीडिया से बातचीत में कहा कि जिला परिषद सीईओ हेमंत स्वरूप माथुर सरकार की छवि को धूमिल करना चाहते हैं और वह खुद ही जनप्रतिनिधि के तौर पर अलग-अलग स्थानों पर मालाएं और साफे पहन रहे हैं, जो कि उनका अधिकार नहीं है। सरपंचों के अधिकारों का भी हनन किया जा रहा है। इसके कारण सभी में रोष व्याप्त है। इसी रोष को प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया है। अगर इस मामले में जल्द कोई कार्यवाही नहीं की जाती है तो सभी जिला परिषद सीईओ हेमंत स्वरूप माथुर के खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ेगा। चाहे उसके लिए कुछ भी करना पड़े। हेमंत स्वरूप माथुर के रवैया के कारण न सिर्फ जनप्रतिनिधि परेशान है, बल्कि आम जनता भी काफी नाराज है। जिसका खामियाजा जनप्रतिनिधियों को भुगतना पड़ता है।