


बेरोजगार एकीकृत महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष उपेन यादव को सोमवार को कोर्ट से जमानत मिल गई है। हालांकि जमानत तस्दीक नहीं होने के कारण उपेन मंगलवार को जेल से रिहा होंगे।
एडीजे कोर्ट क्रम 6 ने जमानत का आदेश दिया हैं। उपेन की छह दिन की रिमांड पूरी होने पर रविवार को कोर्ट ने न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया था। जिसके बाद सोमवार को जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई और कोर्ट ने जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
अधिवक्ता एके जैन ने जमानत याचिका पर पैरवी करते हुए कहा कि जिस मुकदमे में उपेन को गिरफ्तार किया गया है, उससे उसका कोई लेना-देना ही नहीं है। उपेन के भाई मुकेश यादव के खिलाफ वर्ष 2016 में एक ऐसे व्यक्ति ने एफआईआर दर्ज कराई है, जिसके खिलाफ कई मुकदमें लंबित है। जिसमें मुकेश को गिरफ्तार कर लिया गया था और बाद में उसकी जमानत भी हो गई।
अधिवक्ता जैन ने कहा कि प्रकरण में वर्ष 2020 में मुकेश यादव के खिलाफ चालान पेश किया गया। साथ ही तीन के खिलाफ अनुंसधान लंबित रखा गया था। उपेन का ना तो एफआईआर में नाम है और ना ही अनुसंधान लंबित रखा है। केवल वह सरदारशहर जा रहा था, इसलिए उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
अधिवक्ताजैन ने कहा कि यदि चालान पेश होने के बाद अनुसंधान करना हो तो उसके लिए न्यायलय की अनुमति लेनी होती है। जबकि उपेन के खिलाफ तो कोई जांच लंबित ही नहीं थी। साथ ही प्रकरण में दर्ज गवाहों के बयान में भी उपेन को नाम शामिल नहीं हैं।