


बनास नदी में पिछले महीने ही बजरी लीज होल्डर्स को दी गई बजरी खनन की अनुमति के बाद से ही अवैध बजरी खनन का विरोध शुरू हो गया था।लेकिन सोमवार को बजरी लीज धारक कर्मियों ने नियम कायदों के खिलाफ बजरी खनन को नही रोका तो ग्रामीण ही नदी में बजरी खनन को रोकने पहुंच गए जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए।लेकिन ग्रामीणों के गुस्से को भांपते हुए बजरी लीज धारक कर्मियों ने समझाईश की तथा मामले को शांत किया।
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद बनास नदी में लीज से दी गई बजरी खनन की अनुमति के बाद बजरी खनन शुरू हो गया।जिसके बाद से ही बनास नदी में अवैध भजरी खनन को लेकर ग्रामीणों ने जिला कलक्टर सहित पुलिस एवं खनिज विभाग को नियमो के खिलाफ प्रतिबंधित इलाको में लीज होल्डर्स द्धारा बजरी खनन किए जाने की शिकायतें की जा रही थी।लेकिन विभागीय अधिकारियों ने आंखे मूंद रखी थी ऐसे हालातों में सोमवार को ग्रामीणों एवं किसानों का सब्र का बांध टूट गया जिन्होंने ही अवैध बजरी खनन के खिलाफ मोर्चा सम्भालते हुए प्रतिबंधित क्षेत्र में बजरी खनन को रोकने जा धमके।जिन्होंने बजरी खनन कर रहे कर्मियों को वहां से भगा दिया इतना ही नही जेसीबी सहित बजरी लीज धारक कर्मियों को खदेड़ दिया।
अवैध बजरी खनन से आक्रोशित किसानों एवं ग्रामीणों ने बनास नदी पहुंच करके बजरी लीज़ धारक के कार्मिकों द्वारा किए जा रहे बजरी खनन को रुकवा दिया साथ ही वाहनों को खदेड़ दिया।जिससे वजीरपुरा गांव के समीप बनास नदी इलाके में तनावपूर्ण हालात पैदा हो गए। जिसकी इतला मिलते ही बजरी लीज होल्डर्स सहित अन्य कर्मचारी भी वहां पहुंचे और आक्रोशित ग्रामीणों से बातचीत की। जिसके बाद आक्रोशित भीड़ शांत हुई।
ग्रामीणों का आरोप है कि बजरी लीज होल्डर्स के लोग नदी में चेकपोस्ट लगा रखी है तथा अहमदपुरा की रवन्ना रसीद से वजीरपुरा मोलाईपुरा जैसे प्रतिबंधित क्षेत्रो में पुलिस, प्रशासन और खनिज विभाग की सांठ गांठ से बनास में बजरी निकाल रहे है।ग्रामीणों का आरोप है कि बजरी लीज होल्डर्स नियमो की खुली धज्जियां उड़ाते हुए अवैध बजरी खनन से उनके क्षेत्रोँ के पानी के कुँए तथा अन्य जल स्त्रोतो को नुकसान पहुंचा रहा है।उन्होंने बताया कि इससे कुंओं व जलस्त्रोत पूरी तरह से सूखने के हालात बनते जा रहे है। बाद में सदर पुलिस भी वहां पहुंची साथ ही तनाव के हालात देखते हुए बनास नदी में अतिरिक्त जाप्ता तैनात किया गया है।