


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा किदेश की जेलों में आदिवासी और अनपढ़ हजारों ऐसे कैदी और उनके परिवारजन है जो कि अपने अधिकारों के लिए कानूनी तौर पर लड़ नहीं पाते हैं। उन्हें डर लगता है कि कानून के रखवाले वकील और जज उनकी हकीकत को जान का न्याय करेंगे या नहीं। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि न्याय के क्षेत्र में ऐसे लोगों की सहायता के लिए न्यायिक प्रक्रिया को सरल बनाए जाने के लिए कुछ करने की जरूरत है।
सविधान दिवस के मौके पर राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और जिले के कोर्ट के न्यायाधीशों को इसमें सहयोग करने की जरूरत है और आने वाले समय में बरसों से जेलों में बंद ऐसे कैदियों को छुड़ाए जाने के लिए नियम बदलने की जरूरत है तो उसे भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब मैं झारखंड की राज्यपाल बनी तो मैंने वहां ऐसे कैदियों की मदद के लिए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के माध्यम से कुछ ऐसे फैसले कराएं जो कि पीड़ित कैदियों को राहत दिलाने वाले बने।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और विधि मंत्री से आग्रह किया कि वे मौजूदा स्थिति को देखें और ऐसे कैदियों की मदद के लिए कुछ किया जाना चाहिए । उन्होंने कहा कि गांव में लोग शिक्षक, डॉक्टर और वकील को भगवान का दर्जा देते हैं । उन्होंने कहा कि यह तीनों लोग समाज के लिए कुछ कर सकते हैं लेकिन इसके लिए हम सबको जागृत होना ही पड़ेगा और जो लोग अनपढ़ और पीड़ित लोग हैं उनकी मदद के लिए आगे आना पड़ेगा। उन्होंने संविधान दिवस पर आयोजित सुप्रीम कोर्ट के कार्यक्रम में मौजूद सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों, के साथ ही जिले कि न्यायपालिका से आए हुए न्यायाधीशो से यही कहा कि आप कुछ कीजिए मैं इसके लिए आपको ही अधिकृत करती हूं।