


ग्रेटर नगर निगम ग्रेटर की मेयर सौम्या गुर्जर ने गुरुवार को स्वायत्त शासन निदेशालय को अपना जवाब पेश कर दिया है। उन्होंने जवाब देने से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने अपनी पूरी बात रखी। इसके बाद देर शाम को लिखित जवाब स्वायत्त शासन निदेशक को भिजवाया।
जवाब देने के बाद मेरा सौम्या गुर्जर ने पत्रकारों से बातचीत बातचीत करते हुए कहा कि मैंने अपना सारा रिप्रजेटेंशन सीएम अशोक गहलोत को दे दिया है। सीएम गहलोत ने भी मेरी पूरी बात को सुना है। मुझे उम्मीद है कि न्याय मिलेगा। सौम्या के इस चौंकाने वाले कदम से अब कयास लगाए जा रहे हैं कि ये मामला ठंडे बस्ते में जा सकता है।
स्वायत्त शासन निदेशालय मेयर सौम्या गुर्जर के जवाब का अब कानूनी अध्ययन करवाएगी। कानूनी अध्ययन के बाद अगर स्वायत्त शासन निदेशालय को जवाब संतोषजनक लगेगा तो सौम्या को बरी भी किया जा सकता है। सूत्रों की माने तो इससे पहले सितम्बर में जब सौम्या को मेयर के पद से निलंबित किया था, तब इसका निर्णय स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल के स्तर पर किया गया था। इस बार इस मामले को सीएम गहलोत के स्तर पर भिजवाने के कयास लगाए जा रहे थे।
स्वायत्त शासन निदेशालय अगर सौम्या को दोबारा पद से बर्खास्त करती है तो सौम्या के पास दोबारा हाईकोर्ट जाने का विकल्प रहेगा। सौम्या की तरफ से इस मामले की हाईकोर्ट में पैरवी करने वाले अधिवक्ता महेन्द्र सारण की माने तो सरकार के किसी भी अंतिम निर्णय को ज्यूडिशरी रिव्यू करने का अधिकार हर किसी के पास है। फिर चाहे नगर पालिका अधिनियम में सरकार ने ये प्रावधान क्यों न कर रखा हो कि सरकार की ओर से एक बार पद से बर्खास्त करने के बाद कोर्ट में उसे चुनौती नहीं दे सकते।